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बिहार की सियासत में ‘सिंघम’ की एंट्री — 150 एनकाउंटर वाले पूर्व IPS आनंद मिश्रा बने बक्सर के नए मजबूत नेता

पटना/17/11/2025

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बिहार की राजनीति में इस बार सिर्फ चुनावी नतीजे नहीं बदले, कई चेहरों की पहचान भी बदल गई। उन्हीं में से एक नाम है—असम-मेघालय कैडर के पूर्व IPS आनंद मिश्रा, जिन्हें पुलिस सेवा में रहते हुए लोग ‘सुपरकॉप’ और ‘सिंघम’ कहकर बुलाते थे। करीब 150 एनकाउंटर, उग्रवादियों के खिलाफ सटीक ऑपरेशन और नशा माफिया पर शिकंजा—यह उनका वह रिकॉर्ड है जिसने उन्हें पुलिस वर्दी में एक कड़क, सीधी और जवाबदेह अधिकारी की पहचान दिलाई।

अब वही अंदाज़, वही तेजी और वही सिस्टम को हिलाकर रख देने वाली कार्यशैली बक्सर की राजनीति में उतर चुकी है। बक्सर सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार को 28 हजार से अधिक वोटों से मात देने के 24 घंटे के भीतर ही मिश्रा ने जनता के लिए हेल्पलाइन नंबर 9288012121 जारी कर अपने राजनीतिक सफर की पहली झलक दिखा दी—संदेश साफ है, बक्सर में अब प्रशासनिक शैली की राजनीति होगी, धीमी नहीं, तेज़।

आनंद मिश्रा की यात्रा साधारण नहीं रही। भोजपुर के पड़सौरा गांव में जन्मे मिश्रा ने युवा उम्र में UPSC क्रैक कर IPS की वर्दी पहनी और पहले ही कार्यकाल में यह साफ कर दिया कि वह पारंपरिक अधिकारी नहीं होंगे। मेघालय के गारो हिल्स से लेकर असम के लखीमपुर, धुबरी और नगांव तक उनके ऑपरेशन अपराधियों की रातों की नींद उड़ा देने वाले साबित हुए। उनकी सख्त छवि, जमीन से जुड़ाव, बाइक पर गांव-कस्बों तक पहुंचती रफ्तार और सोशल मीडिया पर सरल, दोस्ताना अंदाज़ ने उन्हें युवाओं के बीच एक अलग किस्म की लोकप्रियता दिलाई—एक ऐसा अफसर जो मैदान में सख्त और जनता के बीच बेहद सहज दिखाई देता है।

जनवरी 2024 में उन्होंने IPS की नौकरी छोड़कर नया रास्ता चुना। लोकसभा चुनाव में निर्दलीय उतरकर 50 हजार से ज्यादा वोट बटोरना उनके प्रभाव का शुरुआती प्रमाण था। इसके बाद उन्होंने जन सुराज पार्टी जॉइन की, फिर स्थिति बदलने पर बीजेपी का दामन थाम लिया और पार्टी ने भी बक्सर जैसी मुश्किल सीट पर उन पर भरोसा किया। यह भरोसा सफल साबित हुआ—ऐसी सीट जिसे वर्षों से कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता था, वह इस बार प्रशासनिक साख और साफ छवि के आगे ढह गई। बक्सर के मतदाताओं ने इस बार जातीय समीकरण नहीं, बल्कि काम करने की क्षमता, विश्वसनीयता और तेज़ नेतृत्व को प्राथमिकता दी।

यह जीत सिर्फ विधानसभा की एक सीट नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नए दौर का संकेत है—जहां संगठन, भीड़ और जाति के पारंपरिक फार्मूले के साथ-साथ प्रशासनिक दक्षता और व्यक्तिगत ईमानदारी भी निर्णायक भूमिका निभाने लगी है। आनंद मिश्रा की एंट्री बताती है कि राज्य की राजनीति में ‘सुपरकॉप से नेता’ की नई शैली न सिर्फ स्वीकार हो रही है, बल्कि तेज़ी से प्रभाव भी दिखा रही है। अब नजरें इस बात पर टिक गई हैं कि IPS जैसी फुर्ती और जवाबदेही लेकर आए आनंद मिश्रा बक्सर के विकास, प्रशासनिक सुधार और कानून-व्यवस्था में कितना नया बदलाव लाते हैं। इतना तय है—बक्सर अब एक नए अंदाज़ की राजनीति देखेगा।

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