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हिमाचल पंचायत चुनाव पर मंडरा रहा संवैधानिक संकट — हाईकोर्ट में आज अहम सुनवाई

शिमला/17/11/2025

shimla court

हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव टलने की आशंका अब अदालत तक पहुँच गई है। राज्य में पंचायतों का कार्यकाल समाप्ति की ओर है, लेकिन चुनाव कार्यक्रम अभी तक घोषित न होने पर उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है। हाईकोर्ट आज इस मामले में अहम सुनवाई करेगा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार डिजास्टर एक्ट का सहारा लेकर चुनाव अनिश्चितकाल के लिए पीछे धकेल रही है, जो संविधान की भावना के खिलाफ है।

याचिकाकर्ता, जो स्वयं हाईकोर्ट के अधिवक्ता हैं, का कहना है कि राज्य सरकार और स्टेट इलेक्शन कमीशन दोनों ने पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव समय पर कराने के लिए आवश्यक तैयारी नहीं की है। 8 अक्टूबर को मुख्य सचिव ने आपदा प्रबंधन अधिनियम का हवाला देकर कहा था कि हालात सामान्य होने के बाद ही चुनाव होंगे। इसके बाद कैबिनेट ने भी पंचायतों के पुनर्गठन का निर्णय लिया, जिससे चुनाव प्रक्रिया और जटिल हो गई। वहीं, जिलाधिकारियों ने वोटर लिस्ट बनाने का काम पूरा कर लिया है, लेकिन उसकी पब्लिकेशन रोक दी गई है, जिससे चुनाव को लेकर असमंजस और बढ़ गया है।

याचिका में संविधान के अनुच्छेद 243-ई और 243-के सहित हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धाराओं 120 और 160 का हवाला दिया गया है। इन प्रावधानों के अनुसार किसी भी पंचायत का कार्यकाल पाँच साल से अधिक नहीं हो सकता और चुनाव मौजूदा प्रतिनिधियों के कार्यकाल समाप्त होने से पहले कराना अनिवार्य है। याचिकाकर्ता का कहना है कि आपदा या कानून-व्यवस्था जैसी असाधारण परिस्थिति न होने पर सरकार चुनाव टालने की अधिकारी नहीं है।

जनहित में दायर इस याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि वह हस्तक्षेप कर यह सुनिश्चित करे कि प्रदेश में चुनाव निर्धारित समयसीमा में कराए जाएँ। याचिकाकर्ता के अनुसार यदि समय पर चुनाव नहीं हुए तो पंचायत राज व्यवस्था की वैधता और लोकतांत्रिक ढाँचा दोनों प्रभावित होंगे।

राज्य की 3577 पंचायतों और 71 नगर निकायों में इसी वर्ष चुनाव प्रस्तावित हैं। वर्तमान प्रतिनिधियों का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को समाप्त होगा। स्टेट इलेक्शन कमीशन दिसंबर में चुनाव कराने के पक्ष में है, क्योंकि जनवरी में हिमाचल के कई जिलों में भारी बर्फबारी से मतदान व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है। पंचायतों में कुल पाँच पदों—प्रधान, उपप्रधान, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य—के लिए चुनाव होंगे, जबकि नगर निकायों में वार्ड पार्षद चुने जाएँगे।

अब सबकी नजरें हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, क्योंकि यही तय करेगा कि हिमाचल में पंचायत चुनाव समय पर होंगे या देरी का सिलसिला जारी रहेगा।

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