सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार: “ऐसे अधिकारी सेवा में रहने लायक नहीं” — विमल नेगी केस की जांच पर उठे गंभीर सवाल
नई दिल्ली/18/11/2025
सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) के अधिकारी विमल नेगी की संदिग्ध मौत से जुड़े मामले की जांच कर रही सीबीआई की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी की है। अदालत ने जांच दल के कुछ अधिकारियों को “पूरी तरह फर्जी” बताते हुए कहा कि ऐसे अधिकारी सेवा में बने रहने लायक नहीं हैं। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्ला और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ देशराज नामक आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, तभी अदालत ने यह सख्त रुख अपनाया।
पीठ ने अवलोकन किया कि सीबीआई द्वारा पूछे गए सवाल न केवल कमजोर थे बल्कि जांच प्रक्रिया को मज़ाक जैसा बनाते हैं। अदालत ने कहा कि अभियुक्त से यह पूछना कि क्या उसने जुर्म किया है, और उसके इनकार करने को “जांच में असहयोग” बताना पूरी तरह अपेशेवर रवैया है। जजों ने टिप्पणी की—
“अगर अभियुक्त कहता है कि उसने कुछ नहीं किया, तो इसे असहयोग कैसे कह सकते हैं? चुप रहने का अधिकार उसका संवैधानिक अधिकार है।”
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के रवैये को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि इस तरह की जांच न केवल संस्थान की विश्वसनीयता को आघात पहुंचाती है बल्कि यह गंभीर आपराधिक मामलों की तह तक पहुंचने में भी बाधा बनती है। पीठ ने साफ कहा—“ऐसे अधिकारी तो सेवा में रहने के काबिल ही नहीं हैं।”
मामले से जुड़ा आरोप है कि HPPCL के अधिकारी विमल नेगी पर उनके वरिष्ठ अधिकारियों, जिनमें प्रबंध निदेशक हरिकेश मीणा और निदेशक (विद्युत) देशराज शामिल हैं, द्वारा गंभीर मानसिक दबाव डाला जा रहा था। परिवार का आरोप है कि उन पर गलत काम कराने के लिए दबाव बनाया गया, जिसके चलते वह अत्यधिक तनाव में थे और अंततः आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो गए।
अदालत ने देशराज को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी, लेकिन साथ ही यह भी साफ किया कि सीबीआई की जांच में गंभीर खामियां हैं और एजेंसी को अपने अधिकारियों के व्यवहार और क्षमता की गहन समीक्षा करनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी न केवल इस मामले की दिशा बदल सकती है, बल्कि सीबीआई की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल छोड़ गई है।