हिमाचल में पंचायत चुनाव पर सियासी घमासान तेज: सचिव का तबादला, मंत्री की चुप्पी और जयराम के वार
शिमला/19/11/2025
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के बीच खींचतान खुलकर सामने आ गई है। पंचायतों के कार्यकाल में सिर्फ 75 दिन बचे हैं, लेकिन चुनाव करवाने को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। इस बीच सरकार ने विभागीय स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए पंचायती राज विभाग के सचिव का तबादला कर दिया, वहीं विपक्ष ने सरकार पर चुनाव टालने के आरोपों को लेकर हमला तेज कर दिया है।
मंत्री अनिरुद्ध सिंह की चुप्पी ने बढ़ाए सवाल
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा हाल ही में पंचायतों तथा नगर निकायों के पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन पर रोक लगाई गई है। इस पूरे मामले पर पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने किसी भी टिप्पणी से साफ इनकार कर दिया है। उनकी चुप्पी ने सरकार के भीतर की स्थिति और निर्णयों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
जयराम ठाकुर का सरकार पर ताबड़तोड़ हमला
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि कांग्रेस को अपनी हार साफ दिखाई दे रही है, इसलिए वह चुनावों से बचने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि—
“कांग्रेस बुरी तरह हार रही है, यही कारण है कि चुनाव टालने की नौबत आ गई है।"
प्रदेश की मौजूदा स्थिति और जनता का माहौल सरकार के पक्ष में नहीं है।
आपदा को बहाना बनाकर सरकार अपनी राजनीतिक जमीन बचाने में जुटी है।
जयराम ठाकुर ने यह भी कहा कि सोमवार को राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी नोटिफिकेशन कांग्रेस सरकार के लिए बड़ा झटका है।
सुक्खू सरकार ने किया विभागीय फेरबदल
चुनावी विवाद के बीच मंगलवार को सरकार ने एक अहम निर्णय लेते हुए पंचायती राज विभाग के सचिव राजेश शर्मा का तबादला कर दिया है। उनकी जगह सी. पालरासु को विभाग का नया सचिव नियुक्त किया गया है।
राजनीतिक हलकों में इस तबादले को चुनावी तैयारियों से जोडकर देखा जा रहा है।
हाईकोर्ट ने सरकार और आयोग को भेजा नोटिस
पंचायत चुनावों को लेकर दायर की गई याचिका पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार और राज्य चुनाव आयोग दोनों से जवाब मांगा है। अदालत में अब इस मामले की अगली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे चुनावी प्रक्रिया पर आगे का रास्ता भी तय हो सकता है।
सीएम सुक्खू का बयान—पहली जिम्मेदारी राहत कार्य
पालमपुर में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश अभी भी प्राकृतिक आपदा के प्रभावों से जूझ रहा है और सरकार का पहला दायित्व लोगों तक राहत पहुंचाना है।
उन्होंने सवाल उठाया—
जब कई पंचायतों की सड़कें तक नहीं खुली, तो मतदाताओं को मतदान के लिए कैसे लाया जाएगा?
मतदाताओं के अधिकारों से समझौता नहीं किया जा सकता।
सीएम ने कहा कि निर्वाचन आयोग की अधिसूचना का कानूनी अध्ययन किया जाएगा और उसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
हिमाचल में पंचायत चुनावों को लेकर राजनीतिक टकराव चरम पर है। सरकार राहत कार्यों का हवाला दे रही है, जबकि विपक्ष इसे चुनाव से बचने की रणनीति बता रहा है। सचिव के तबादले से लेकर हाईकोर्ट के नोटिस तक, हर मोड़ पर मामला और पेचीदा होता जा रहा है। आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा कि चुनाव समय पर होंगे या टकराव और बढ़ेगा।