हाईकोर्ट का बड़ा निर्णय: अब तीसरे बच्चे पर भी मिलेगा मातृत्व अवकाश, महिला कर्मचारी को मिली राहत
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मातृत्व अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता महिला कर्मचारी को तीसरे बच्चे के जन्म पर मातृत्व अवकाश देने का आदेश जारी किया है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की एकल पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों को केवल नियमों की सीमाओं में नहीं बाँधा जा सकता, बल्कि संविधान में निहित महिला की गरिमा और उसके मौलिक अधिकारों के आधार पर देखा जाना चाहिए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि भले ही केंद्रीय सिविल सेवा अवकाश नियम 1972 में तीसरे जैविक बच्चे पर मातृत्व अवकाश का स्पष्ट प्रावधान नहीं है, लेकिन मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 (संशोधित 2017), धारा 5(3) के तहत ऐसे मामलों में अवकाश मिल सकता है। हालांकि यह अवधि पहले दो बच्चों की तुलना में कम होती है।
मामले में याचिकाकर्ता एक 43 वर्षीय टीजीटी अध्यापिका हैं, जिन्होंने अपने तीसरे बच्चे के जन्म पर मातृत्व अवकाश की मांग की थी। विभाग ने नियमों का हवाला देकर उनका आवेदन खारिज कर दिया। लेकिन अदालत ने पाया कि यह बच्चा महिला का दूसरे पति से पहला जैविक बच्चा है।
महिला की पहली शादी से दो बच्चे हैं, जिनमें से एक गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। दूसरी ओर, उसके वर्तमान पति ने अपनी पहली पत्नी और बच्चे को एक सड़क दुर्घटना में खो दिया था। अदालत ने इन परिस्थितियों को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए कहा कि ऐसे मामले में अवकाश से इनकार करना महिला के मौलिक अधिकारों और उसकी गरिमा का उल्लंघन है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिका में आवेदन की तारीख से 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश दिया जाए। यह फैसला अनुराधा बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले में सुनाया गया है, जिसे मातृत्व अधिकारों की दृष्टि से एक मिसाल माना जा रहा है।