हिमाचल में स्ट्रे डॉग्स का आतंक! हजारों लोग हर साल बन रहे शिकार
शिमला।20।08।2025
शिमला: देशभर में आवारा कुत्तों (Stray Dogs) की बढ़ती संख्या लोगों के लिए खतरा बन चुकी है। भारत में स्ट्रे डॉग्स की कुल संख्या 1.6 करोड़ से अधिक है। वहीं, हिमाचल प्रदेश में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। यहां अब तक 68,121 स्ट्रे डॉग्स दर्ज किए गए हैं। चिंताजनक बात यह है कि कुत्तों के काटने के मामले और रेबीज से मौत के आंकड़े साल दर साल बढ़ते जा रहे हैं।
हिमाचल में डॉग्स बाइट के बढ़ते आंकड़े
एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) के अनुसार, हिमाचल में 2022 में 15,935, 2023 में 21,096 और 2024 में 22,909 लोगों को आवारा कुत्तों ने काटा। सिर्फ जनवरी 2025 में ही 2,135 डॉग बाइट के केस सामने आ चुके हैं। वहीं, रेबीज से 2022 और 2023 में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई, जबकि 2024 में तीन लोगों की मौत दर्ज की गई। लगातार बढ़ते ये आंकड़े प्रदेश में चिंता की बड़ी वजह बन गए हैं।
देशभर में हालात और भी भयावह
देशभर में भी कुत्तों के काटने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। आंकड़ों के अनुसार, 2022 में 21.9 लाख से बढ़कर 2024 में 37.1 लाख तक केस दर्ज हुए, जबकि जनवरी 2025 तक ही 4.29 लाख मामले दर्ज हो चुके हैं। इसी दौरान, मानव रेबीज मौतों की संख्या 2022 में 21 से बढ़कर 2024 में 54 तक पहुंच गई।
किन राज्यों में डॉग्स बाइट सबसे ज्यादा
सिर्फ 2024 में ही महाराष्ट्र (4.85 लाख), तमिलनाडु (4.80 लाख), आंध्रप्रदेश (2.45 लाख), गुजरात (3.92 लाख), कर्नाटक (3.61 लाख) और बिहार (2.63 लाख) जैसे राज्यों में डॉग्स बाइट के मामले सबसे ज्यादा दर्ज किए गए। यह आंकड़े दिखाते हैं कि यह समस्या सिर्फ छोटे राज्यों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है।
सरकार और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
आवारा कुत्तों की समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने Animal Birth Control (Dog) Rules, 2023 लागू किए हैं। इसके तहत कुत्तों की नसबंदी (Sterilization) और टीकाकरण (Vaccination) को अनिवार्य किया गया है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल ही में आदेश दिया कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र से 6–8 हफ्तों में सभी स्ट्रे डॉग्स को हटाकर शेल्टर में रखा जाए। हालांकि, इस आदेश पर डॉग लवर्स और एनजीओ ने आपत्ति जताई है, क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर शेल्टर की व्यवस्था करना फिलहाल नामुमकिन है।
क्यों अहम है स्ट्रे डॉग्स पर नियंत्रण?
विशेषज्ञों का मानना है कि आवारा कुत्ते सिर्फ काटने और रेबीज फैलाने की वजह नहीं बनते, बल्कि शहरी क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं और "मैन-डॉग कॉन्फ्लिक्ट" के लिए भी जिम्मेदार हैं। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।
हिमाचल में बढ़ती चिंता
हिमाचल जैसे छोटे राज्य में भी 68 हजार से अधिक आवारा कुत्ते दर्ज किए गए हैं। लगातार बढ़ रहे डॉग बाइट और रेबीज केसों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय निकायों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बंध्याकरण और वैक्सीनेशन अभियान तेज करें। NAPRE 2030 योजना के तहत भारत ने 2030 तक रेबीज पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन मौजूदा हालात इस लक्ष्य तक पहुंचने की राह कठिन दिखा रहे हैं।
साफ है कि हिमाचल समेत पूरे देश में स्ट्रे डॉग्स का आतंक एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन गया है। अगर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले सालों में यह और गंभीर रूप ले सकता है।