हिमाचल में लंबित डीए किस्तों पर गरमाई सियासत
विनोद कुमार ने जयराम ठाकुर के बयान को बताया घड़ियाली आँसू
शिमला।24।08।2025
हिमाचल प्रदेश में कर्मचारियों को मिलने वाली लंबित महंगाई भत्ते (डीए) की किस्तों को लेकर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के हालिया बयान पर संयुक्त कर्मचारी महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विनोद कुमार ने कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने जयराम ठाकुर के बयान को घड़ियाली आँसू बताते हुए इसे महज़ कर्मचारियों की सहानुभूति बटोरने की राजनीतिक चाल करार दिया।
विनोद कुमार ने कहा कि भाजपा विधायक सतपाल सत्ती ने विधानसभा में नेक नियत से डीए का मुद्दा जरूर उठाया था, लेकिन सदन के भीतर तथ्यों और आँकड़ों के साथ गंभीर चर्चा करने के बजाय बाहर आकर केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की गई।
पूर्व सरकारों का डीए रिकॉर्ड
विनोद कुमार ने आँकड़ों के साथ पूर्व सरकारों का ब्यौरा भी रखा। उन्होंने बताया कि प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में वर्ष 2008 से 2012 के बीच कर्मचारियों को 63% डीए का भुगतान किया गया और 2006 वेतन आयोग की सिफारिशों को 2010 में अक्षरशः लागू करते हुए सभी एरियर भी दिए गए।
इसके बाद वीरभद्र सिंह सरकार (2013-2017) के दौरान 57% डीए का भुगतान हुआ। वहीं जयराम ठाकुर सरकार (2018-2022) ने कुल 38% में से केवल 26% डीए दिया। कोरोना काल में केंद्र सरकार ने रोका गया 11% डीए वर्ष 2022 में बहाल किया, लेकिन हिमाचल की भाजपा सरकार ने उसमें से केवल 6% लागू किया और 5% स्थायी रूप से बंद कर दिया। साथ ही जनवरी और जुलाई 2022 की 7% डीए किस्तें भी कर्मचारियों को नहीं दी गईं।
सुक्खू सरकार का दावा और अधूरी घोषणाएँ
वर्तमान में सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने लंबित 11% डीए (दो किस्तें 7% और जनवरी 2023 की 4%) जारी किया है। बजट में जुलाई 2023 की चौथी किस्त की घोषणा भी की गई थी, लेकिन अभी तक उसकी अधिसूचना जारी नहीं हुई है। विनोद कुमार ने इसे कर्मचारियों के साथ वित्तीय अन्याय बताते हुए सरकार से तुरंत अधिसूचना जारी करने और शेष तीन लंबित किस्तों के भुगतान के लिए वित्तीय प्रबंध करने की माँग की है।
जयराम ठाकुर पर सियासी प्रहार
महासंघ ने जयराम ठाकुर के उस बयान को भी राजनीतिक साज़िश बताया जिसमें उन्होंने कहा था कि एनपीएस-ओपीएस का मुद्दा कोई बड़ा विषय नहीं था, बल्कि यह सिर्फ कर्मचारियों की माँग थी। विनोद कुमार ने पलटवार करते हुए कहा कि जयराम ठाकुर को यह बताना चाहिए कि वे सत्ता में कैसे आए और सत्ता से क्यों बेदखल हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि ठाकुर ने हमेशा कर्मचारियों से छल किया और केवल अपने विधानसभा क्षेत्र सराज और धर्मपुर तक ही सीमित मुख्यमंत्री रहे।