हिमाचल में स्क्रब टाइफस का प्रकोप: IGMC शिमला में दूसरी मौत, अब तक 56 मामले दर्ज
हिमाचल/27/08/2025
हिमाचल प्रदेश में स्क्रब टाइफस का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। शिमला के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान महाविद्यालय एवं चिकित्सालय (आईजीएमसी) में इस बीमारी से दूसरी मौत हो गई है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, अब तक स्क्रब टाइफस के कुल 56 मामले सामने आ चुके हैं, जो स्वास्थ्य विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
ताज़ा मामला कुमारसैन तहसील के गांव भरेरी धार की रहने वाली 74 वर्षीय चंपा देवी का है। उन्हें 22 अगस्त को गंभीर हालत में आईजीएमसी लाया गया था और महिला मेडिसिन वार्ड के आईसीयू में भर्ती किया गया। जांच में सैप्सिस मल्टी ऑर्गन डिस्फंक्शन सिंड्रोम और स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई। डॉक्टरों की पूरी टीम लगातार इलाज करती रही, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ और 25 अगस्त की शाम कार्डियो पल्मोनरी अरेस्ट से उनकी मौत हो गई।
क्या है स्क्रब टाइफस?
स्क्रब टाइफस ऑरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी नामक बैक्टीरिया से फैलने वाली बीमारी है। यह छोटे-छोटे कीटों (माइट्स) के काटने से होता है, जो खेतों, झाड़ियों और घास वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
लक्षण और खतरे
इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, त्वचा पर लाल चकत्ते और काटे गए स्थान पर काली पपड़ी जैसी सूजन शामिल है। समय रहते इलाज न मिलने पर यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है।
बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। खेतों और झाड़ियों में काम करते समय पूरे बाजू के कपड़े और जूते पहनना जरूरी है। घर के आसपास की झाड़ियों और घास की नियमित सफाई करें। पालतू जानवरों की जांच भी करते रहें, क्योंकि वे भी इन कीटों को घर तक ला सकते हैं।
यदि तेज बुखार या स्क्रब टाइफस के कोई भी लक्षण दिखें तो तुरंत नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र या आईजीएमसी में जांच कराएं। समय पर इलाज मिलने पर बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है और जान बचाई जा सकती है।