हिमाचल में बढ़ रहे कैंसर के मरीज: आबादी के हिसाब से देश में दूसरे नंबर पर प्रदेश
शिमला/28/08/2025
हिमाचल प्रदेश में कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और यह स्वास्थ्य विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। विधानसभा के मानसून सत्र में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि नॉर्थ ईस्ट राज्यों के बाद आबादी की दृष्टि से हिमाचल प्रदेश कैंसर मरीजों की संख्या में दूसरे नंबर पर है। आईजीएमसी शिमला के कैंसर विशेषज्ञ डॉ. सिद्धार्थ वत्स के अनुसार प्रदेश में हर साल दो हजार से ज्यादा नए कैंसर मरीज सामने आते हैं और पिछले दस वर्षों में यह संख्या लगभग दोगुनी हो चुकी है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2022 में 2,428, साल 2023 में 2,363 और साल 2024 में 1,836 नए मरीज दर्ज किए गए।
जिलेवार आंकड़ों की बात करें तो मंडी और शिमला में सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। साल 2022 में मंडी में 668 और शिमला में 556 मरीज दर्ज हुए, जबकि 2023 में मंडी में 614 और शिमला में 595 मामले आए। साल 2024 में मंडी में 425 और शिमला में 493 नए मरीज दर्ज किए गए। इसके अलावा कुल्लू, सोलन, बिलासपुर, चंबा, हमीरपुर, सिरमौर और ऊना समेत कई जिलों में भी कैंसर के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
आईजीएमसी शिमला में अकेले साल 2024 में 215 बच्चेदानी (सर्वाइकल), 157 ब्रेस्ट, 367 लंग्स, 98 पेट और 180 हेड-नेक कैंसर के मरीज इलाज के लिए पहुंचे। डॉ. वत्स के अनुसार महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर तेजी से बढ़ रहे हैं, जबकि पुरुषों में लंग्स और पेट का कैंसर ज्यादा पाया जा रहा है। खासकर पेट के कैंसर के मामले अन्य राज्यों की तुलना में हिमाचल में अधिक मिल रहे हैं।
डॉ. सिद्धार्थ वत्स का मानना है कि कैंसर के बढ़ने की प्रमुख वजहें हैं – लाइफस्टाइल में बदलाव, तंबाकू और धूम्रपान की लत, असंतुलित खानपान, पर्यावरण प्रदूषण और खेती में पेस्टिसाइड्स का अधिक इस्तेमाल। उन्होंने बताया कि हिमाचल की बड़ी आबादी खेती-बाड़ी पर निर्भर है और खेतों में प्रयोग होने वाले कीटनाशक सीधे तौर पर खाने-पीने की चीजों को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे लोगों में कैंसर का खतरा और बढ़ जाता है।
डॉ. वत्स ने सुझाव दिया कि कैंसर से बचाव ही इसका सबसे बड़ा इलाज है। इसके लिए लोगों को तंबाकू से परहेज करना चाहिए, संतुलित आहार लेना चाहिए, नियमित व्यायाम करना चाहिए और डिस्पोजेबल प्लास्टिक या केमिकल वाले बर्तनों की बजाय स्टील और कांच का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शुरुआती लक्षण दिखते ही लोगों को तुरंत जांच करवानी चाहिए, क्योंकि समय पर जांच और इलाज से कैंसर को हराया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि गांव-गांव कैंसर जांच शिविर लगाने और स्कूलों-कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। इससे बीमारी को शुरुआती चरण में ही पकड़ा जा सकेगा और मरीज की जान बचाई जा सकेगी।
कुल मिलाकर हिमाचल प्रदेश में कैंसर के बढ़ते मामले गंभीर चिंता का विषय हैं और इसके लिए सरकार, स्वास्थ्य विभाग और समाज को मिलकर जागरूकता और रोकथाम की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।