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मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना के सेवा विस्तार पर केंद्र का जवाब, कहा- नियमों के तहत दी गई अनुमति

high court

शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना को दिए गए छह माह के सेवा विस्तार पर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पैरवी की और कहा कि सक्सेना को सेवा विस्तार पूरी तरह से तय नियमों के तहत मुख्यमंत्री के आग्रह पर दिया गया है।

केंद्र ने दलील दी कि प्रबोध सक्सेना पहले भी दो साल तक मुख्य सचिव पद पर रह चुके हैं और उस दौरान उनकी नियुक्ति पर किसी ने सवाल नहीं उठाया था। लेकिन छह माह का सेवा विस्तार दिए जाने के बाद विवाद खड़ा किया गया। सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि एक्सटेंशन की अवधि 30 सितंबर को समाप्त हो जाएगी।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधवालिया और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने पूछा कि क्या इसका अर्थ यह लगाया जाए कि 30 सितंबर के बाद फिर से सेवा विस्तार नहीं दिया जाएगा? इस पर केंद्र की ओर से जवाब आया कि अभी इस पर कुछ कहना जल्दबाज़ी होगी, क्योंकि अब तक राज्य सरकार यानी मुख्यमंत्री की ओर से कोई नया अनुरोध पत्र नहीं मिला है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर तय की है।

अदालत में चुनौती


यह जनहित याचिका अतुल शर्मा नामक व्यक्ति ने दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि प्रबोध सक्सेना के खिलाफ सीबीआई द्वारा दायर आरोपपत्र पर राउज एवेन्यू कोर्ट ने 29 अक्टूबर 2019 को संज्ञान लिया था और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा लंबित है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि ऐसे में दागी अफसर को सेवा विस्तार देना संविधान और नियमों का उल्लंघन है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि जनवरी 2025 में सीबीआई ने पत्र जारी कर पुष्टि की थी कि सक्सेना के खिलाफ आरोपपत्र लंबित है। इसके बावजूद उन्हें 28 मार्च 2025 को केंद्र सरकार ने 30 सितंबर तक सेवा विस्तार प्रदान किया। प्रार्थी का आरोप है कि केंद्र को दी गई सतर्कता रिपोर्ट अधूरी थी और सक्सेना का नाम "संदिग्ध सत्यनिष्ठा सूची" में शामिल नहीं किया गया।

रिकॉर्ड सील्ड कवर में पेश


राज्य सरकार ने अदालत में वांछित रिकॉर्ड सील्ड कवर में पेश किया, जिसे खंडपीठ ने देखने के बाद दोबारा सील कर दिया। केंद्र ने भी साफ किया कि भारी बारिश और खराब मौसम के चलते रिकॉर्ड समय पर दाखिल नहीं हो सका, लेकिन नियमों के तहत अनुमति दी गई है।

अब अदालत इस मामले की गहन सुनवाई 22 सितंबर को करेगी।

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