कौन कर्मचारी है जो अपना पेट काट कर काम करना चाहेगा : राणा
सरकार द्वारा कर्मचारियों को उच्च वेतनमान देने का निर्णय वापस लेना कांग्रेस सरकार का कर्मचारी विरोधी चेहरा उजागर करता है
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा कर्मचारियों को दिया जा रहा हायर ग्रेड वेतनमान वापस लेने के फैसले ने प्रदेश की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है। बीजेपी ने इसे "कर्मचारी विरोधी चेहरा" करार देते हुए कांग्रेस सरकार पर वादाखिलाफी और वित्तीय अव्यवस्था का आरोप लगाया है।
अजय राणा का आरोप – "सत्ता के लिए किए झूठे वादे
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय राणा ने कहा कि राज्य सरकार की देनदारियां इतनी बढ़ गई हैं कि अब उसका आर्थिक ढांचा हिलने लगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सत्ता पाने के लिए बिना सोचे-समझे ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) लागू कर दी और अब कर्मचारियों से किए गए वादों से पीछे हट रही है।
राणा ने कहा, "3 जनवरी 2022 से सिविल सर्विस के कर्मचारियों का हायर ग्रेड खत्म करने का 6 सितंबर को पत्र जारी कर दिया गया है। यह निर्णय पूरी तरह असहनीय है और कर्मचारियों को निरुत्साहित करने वाला है।"
कर्मचारियों पर बड़ा आर्थिक असर
वित्त विभाग द्वारा 6 सितंबर 2022 को जारी अधिसूचना के अनुसार, 89 श्रेणियों के कर्मचारी, जिन्हें भाजपा सरकार के समय उच्च वेतनमान का लाभ दिया गया था, अब इस सुविधा से वंचित रहेंगे।
अधिसूचना में कहा गया है कि इन कर्मचारियों का पुनः वेतन निर्धारित किया जाएगा।
इससे हर कर्मचारी को 10,000 से 15,000 रुपये प्रतिमाह का नुकसान होगा।
सरकार कर रही है भेदभाव
बीजेपी प्रवक्ता ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कर्मचारियों का हक छीनने के साथ ही सत्ता पक्ष अपने चहेतों को गाड़ियां और पद दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि "ये पब्लिक है सुक्खू जी, सब जानती है। आपने जनता से जो वादे किए थे, अब उसके उलट फैसले लेकर हिमाचल को मुश्किल में डाल दिया है।"
दूरगामी परिणामों की चेतावनी
राणा ने चेतावनी दी कि यह फैसला प्रदेश में गंभीर परिणाम ला सकता है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी विरोध करेंगे और इससे सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा होगी।