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चेक बाउंस पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मालिक पर नहीं बनता आपराधिक केस

शिमला/10/09/2025

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शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामले में एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि किसी चेक में छेड़छाड़ की गई हो तो वह शून्य माना जाएगा और उसकी कोई कानूनी वैल्यू नहीं रहती। ऐसे में उस चेक के बाउंस होने पर मालिक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जा सकता। यह महत्वपूर्ण निर्णय न्यायमूर्ति राकेश कैंथला ने सुनाया है। अदालत ने राजिंदर शर्मा नामक व्यक्ति की याचिका को स्वीकार करते हुए बघाट अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक की ओर से दर्ज शिकायत को खारिज कर दिया और निचली अदालतों के फैसलों को निरस्त करते हुए आरोपी को बरी कर दिया।

मामले के अनुसार, बघाट अर्बन बैंक ने आरोपी राजिंदर शर्मा को 2015 में लोन दिया था। जब उसने भुगतान नहीं किया तो बैंक ने उससे सात लाख रुपये का चेक प्राप्त किया, लेकिन खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण यह चेक बाउंस हो गया। बैंक ने आरोपी को नोटिस भेजकर रकम लौटाने को कहा, जिसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा। आरोपी ने अपनी सफाई में कहा कि बैंक ने उससे पांच चेक जमानत के तौर पर लिए थे और उसके एक चेक में छेड़छाड़ की गई थी। मूल खाता संख्या "सीडी-5956" को काटकर "सीडी-6033" कर दिया गया था और इस तथ्य को बैंक अधिकारी ने भी स्वीकार किया।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चेक में की गई छेड़छाड़ उसके कानूनी स्वरूप को बदल देती है। यदि शिकायतकर्ता यह साबित नहीं कर पाता कि छेड़छाड़ मालिक ने की है, तो ऐसे मामले में चेक बाउंस को आधार बनाकर आपराधिक कार्रवाई नहीं हो सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि भले ही देनदारी साबित हो जाए, मगर छेड़छाड़ के कारण यदि चेक शून्य हो जाए तो आपराधिक मामला नहीं बनता। यह फैसला भविष्य में चेक बाउंस मामलों में एक अहम नज़ीर साबित हो सकता है।

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