हिमाचल में MIS योजना के तहत खरीदे सेब सड़क किनारे सड़ रहे
HPMC और सरकार पर उठे सवाल
हिमाचल प्रदेश में इस बार मंडी मध्यस्थता योजना (MIS) के तहत HPMC द्वारा बागवानों से खरीदे गए हजारों टन सेब अब सड़कों के किनारे सड़ रहे हैं। सरकार के उपक्रम हिमाचल बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (HPMC) ने अब तक करीब 43 हजार मीट्रिक टन सेब खरीदा है, लेकिन भारी बारिश, खराब मौसम और कई स्थानों पर सड़कों के बंद होने के चलते सेब का समय पर ट्रांसपोर्टेशन नहीं हो पाया।
परिणामस्वरूप, जुमारकोटखाई, जुब्बल समेत कई इलाकों में सड़क किनारे हजारों बोरियां सड़ रही हैं। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने भी माना कि खराब सड़कों और ट्रकों की कमी के कारण सेब नहीं पहुंच पाए और यही कारण है कि बड़ी मात्रा में सेब फंसा हुआ है। HPMC द्वारा इस बार 276 खरीद केंद्र खोलने की योजना थी, लेकिन केवल 240 केंद्र ही ऑपरेशनल हो सके, जिससे बागवानों को समस्या झेलनी पड़ी।
इस बार MIS योजना के तहत बागवानों से 12 रुपए प्रति किलो की दर से निम्न गुणवत्ता का सेब खरीदा जा रहा है, लेकिन क्वालिटी खराब होने की वजह से लोग HPMC को जबरन सेब दे रहे हैं। HPMC इनमें से 25 हजार मीट्रिक टन सेब को खुद प्रोसेस करेगा और बाकी को ऑक्शन के जरिए बेचा जाएगा, लेकिन खुले में पड़ी बोरियां और खराब होते सेबों को देखकर यह कहा जा सकता है कि सरकार को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सेब के रखरखाव और ऑक्शन की व्यवस्था कमजोर दिख रही है और औने-पौने दामों में ऑक्शन से न केवल बागवानों को नुकसान हो रहा है, बल्कि HPMC और सरकार की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है।