वनतारा को SIT से क्लीन चिट, सुप्रीम कोर्ट में साल्वे ने उठाए सवाल
गुजरात के जामनगर में स्थित वन्यजीव केंद्र वनतारा को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है। अदालत को बताया गया कि हाथियों की खरीद और उन्हें वनतारा में रखने की प्रक्रिया में कोई खामी नहीं पाई गई। कोर्ट ने कहा कि यदि वन विभाग से हाथी खरीदकर नियमों के अनुसार उनकी देखभाल की जा रही है, तो इसमें कोई गलती नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट की बनाई एसआईटी में पूर्व जज, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और वन विशेषज्ञ शामिल थे, जिन्होंने 12 सितंबर को अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में कहा गया कि वनतारा में नियमों के मुताबिक जानवरों को रखा जा रहा है और किसी तरह की अनियमितता सामने नहीं आई है। कोर्ट की बेंच ने इस रिपोर्ट को संतोषजनक बताया है और अगली सुनवाई में इसे विस्तार से पढ़कर फैसला लेने की बात कही है।
यह मामला तब उठा जब 25 अगस्त को हाथियों की खरीद को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें सोशल मीडिया पर उठे दावों का हवाला दिया गया था। इसके बाद कोर्ट ने एसआईटी गठित कर जांच का आदेश दिया था।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने वनतारा की ओर से पक्ष रखते हुए कहा कि जांच के दौरान पूरी टीम को हर प्रक्रिया दिखाई गई और नियमों का पालन किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि जानवरों की देखभाल पर भारी खर्च होता है और एक्सपर्ट्स की पूरी टीम वहां तैनात है। हालांकि, साल्वे ने यह भी कहा कि वनतारा पर सवाल उठाने वालों को निशाना बनाया जा रहा है, जो खुद में चिंता की बात है।