NEWS CHOICE

निष्पक्ष खबर, बेबाक अंदाज

उत्तराखंड में जलप्रलय से हाहाकार, मसूरी-देहरादून मार्ग ध्वस्त, 3 की मौत

मसूरी/17/09/2025

masuri 2

उत्तराखंड की पर्यटन नगरी मसूरी में सोमवार देर रात हुई मूसलाधार बारिश ने भयावह स्थिति पैदा कर दी। रातभर की बारिश से बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ, जिससे मसूरी-देहरादून मार्ग 18 स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया है। शिव मंदिर से ऊपर बना पुल पूरी तरह बह गया, जिससे किसी भी वाहन की आवाजाही अब असंभव हो गई है। इस आपदा ने न केवल यातायात व्यवस्था ठप कर दी है, बल्कि जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।

एंबुलेंस में फंसा शव, अंतिम संस्कार बनी चुनौती

बारिश और भूस्खलन के कारण कई संवेदनशील हालात भी पैदा हो गए हैं। मसूरी निवासी विरेंद्र अपने भाई का शव अंतिम संस्कार के लिए देहरादून ले जा रहे थे, लेकिन एंबुलेंस कोलुखेत के पास फंस गई। मजबूरन शव को पैदल और अस्थायी रास्तों से कोठाल गेट तक ले जाने की योजना बनानी पड़ी। यह घटना प्रशासन के लिए भी मानवीय संकट बनकर सामने आई है।

मौतों का सिलसिला, तीन की गई जान

भूस्खलन और मलबे की चपेट में आने से अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। कोलुखेत के पास हुए हादसे में दो नेपाली मजदूर मलबे में दब गए, जिनमें से एक की मौके पर मौत हो गई। वहीं मकरेती गांव में एक घर पर मलबा गिरने से दो अन्य लोगों की जान चली गई। लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन ने लोगों के मन में दहशत पैदा कर दी है।

प्रशासन अलर्ट, राहत कार्य जारी

एसडीएम मसूरी राहुल आनंद ने बताया कि मसूरी-देहरादून रोड पर भारी नुकसान हुआ है और कई स्थानों पर सड़कें पूरी तरह टूट चुकी हैं। वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रुकी हुई है और हालात सामान्य होने में समय लगेगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन लगातार मलबा हटाने और रास्ते बहाल करने की कोशिश में जुटा है। पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने भी झाड़पानी क्षेत्र का दौरा कर पीड़ितों से मुलाकात की और राहत कार्यों का जायजा लिया।

पैदल चलने को मजबूर लोग और पर्यटक

सड़क मार्ग बंद होने से बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक अब चूना खाला और कोठाल गेट तक पैदल 7 किलोमीटर सफर कर रहे हैं। कई यात्रियों ने बताया कि सड़कें पूरी तरह ध्वस्त हो गई हैं और परिवारों को बच्चों व बुजुर्गों के साथ पैदल चलना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि मसूरी में हर साल बारिश के कारण भारी तबाही हो रही है। उन्होंने चेताया कि अगर सरकार ने अब भी जनसंख्या संतुलन और पर्यावरण संरक्षण पर सख्त कदम नहीं उठाए, तो मसूरी हर साल नई त्रासदी झेलेगी।

मूसलाधार बारिश से हुई इस तबाही ने साबित कर दिया है कि केवल राहत कार्य पर्याप्त नहीं हैं। प्रशासन और सरकार को अब दीर्घकालिक योजना और सख्त पर्यावरणीय नीति बनानी होगी, ताकि आने वाले समय में ऐसी आपदाओं से जनजीवन और पर्यटन दोनों को बचाया जा सके।

masuri
Scroll to Top