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किसानों के लिए बड़ी राहत: राज्यों की स्थिति के अनुसार बनेगा कृषि रोडमैप

नई दिल्ली/17/09/2025

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नई दिल्ली। किसानों के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। कृषि मंत्रालय ने घोषणा की है कि अब प्रत्येक राज्य के लिए वहां की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी जमीन और जलवायु के अनुसार सही फसल विकल्प उपलब्ध कराना और उपज में बढ़ोतरी करना है। इसके लिए मंत्रालय राज्यों में कार्यशालाएं आयोजित करेगा, जिनमें अधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की टीमें भाग लेंगी और अपने अनुभव साझा करते हुए कृषि विकास के लिए ठोस सुझाव देंगी।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हर राज्य की परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए एक ही योजना सभी जगह कारगर नहीं हो सकती। उदाहरण के लिए, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम की योजनाएं तमिलनाडु या राजस्थान में लागू नहीं हो सकतीं। इसलिए राज्यों की आवश्यकताओं के आधार पर ही नए रोडमैप तैयार होंगे।

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि विकसित कृषि संकल्प अभियान 3 अक्टूबर से शुरू होगा, जिसके तहत राज्यों में कृषि कार्यशालाएं आयोजित होंगी। इन कार्यशालाओं में जलवायु परिवर्तन से निपटने, गुणवत्तापूर्ण बीज-उर्वरक और कीटनाशक उपलब्ध कराने, बागवानी को बढ़ावा देने, प्राकृतिक खेती, प्रभावी विस्तार सेवाओं और कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका जैसे मुद्दों पर फोकस किया जाएगा।

कृषि मंत्रालय नकली बीज, कीटनाशक और उर्वरकों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून लाने की भी तैयारी कर रहा है। इस संबंध में राज्यों से सुझाव मांगे गए हैं। मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर किसानों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए कठोर कार्रवाई करेंगी।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़े: 2025-26 के लिए 362.50 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। 2024-25 में खाद्यान्न उत्पादन 353.96 मिलियन टन रहा, जो पिछले वर्ष से 21.66 मिलियन टन (6.5%) अधिक है। चावल, गेहूं, मक्का, मूंगफली और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलों की रिकॉर्ड पैदावार हुई है। रबी सीजन की बुवाई के लिए 22.9 मिलियन मीट्रिक टन बीज की जरूरत है, जबकि 25 मिलियन मीट्रिक टन बीज पहले से उपलब्ध है।

इस पहल से किसानों को न केवल बेहतर उपज मिलेगी बल्कि क्षेत्रीय और जलवायु चुनौतियों के अनुरूप उन्हें टिकाऊ कृषि पद्धतियों का लाभ भी मिलेगा।

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