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कांगड़ा में बढ़ी गिद्धों की संख्या, 4 साल की रिसर्च में बड़ा खुलासा

धर्मशाला /18/09/2025

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हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा से पर्यावरण और जैव विविधता को लेकर सकारात्मक खबर सामने आई है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, देहरादून की शोधार्थी माल्याश्री भट्टाचार्य द्वारा किए गए चार साल (2021 से 2024) के रिसर्च में यह खुलासा हुआ है कि जिले में गिद्धों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। विशेष रूप से व्हाइट रंप्ड वल्चर (White Rumped Vulture) की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कांगड़ा में गिद्धों की आबादी 1377 तक पहुंच गई है।

हर साल बढ़ते घोंसले

रिसर्च में सामने आया कि 2021-22 में जिले में 305 घोंसले, 2022-23 में 420 घोंसले और 2023-24 में 459 घोंसले दर्ज किए गए। एक घोंसले में औसतन तीन गिद्ध रहते हैं, ऐसे में गिद्धों की संख्या बढ़कर 1377 तक पहुंच गई है। शोध के दौरान गिद्धों के घोंसले भी देखे गए और पाया गया कि अंडे से निकलने के तीन महीने बाद गिद्ध का बच्चा उड़ना शुरू करता है और करीब दो साल तक अपने घोंसले में लौटता रहता है।

क्यों बढ़ रही है संख्या

शोध में पाया गया कि कांगड़ा के घने चीड़ के जंगल और 36 से अधिक प्राकृतिक हड्डी खाने (Carcass Dumps) गिद्धों के लिए सुरक्षित और समृद्ध आवास का काम कर रहे हैं। यहां मृत पशुओं को छोड़ने से गिद्धों को पर्याप्त भोजन मिल रहा है। इसके अलावा, सरकार द्वारा पशुओं में इस्तेमाल होने वाले एक खास दर्द निवारक इंजेक्शन (डाइक्लोफेनाक) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद गिद्धों की मौतों में भारी कमी आई है। पहले यही इंजेक्शन गिद्धों की आबादी घटने का प्रमुख कारण माना गया था।


क्यों जरूरी हैं गिद्ध

विशेषज्ञों का कहना है कि गिद्ध पारिस्थितिक तंत्र के लिए बेहद अहम हैं। वे मृत पशुओं के शवों को कुछ ही घंटों में साफ कर संक्रमण फैलने से रोकते हैं। इसीलिए गिद्धों को "प्रकृति का सफाईकर्मी" कहा जाता है। गिद्धों की बढ़ती संख्या जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से बड़ी उपलब्धि है।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

वाइल्ड लाइफ धर्मशाला सर्कल के सी.एफ. सरोज भाई पटेल ने कहा, "यह बेहद सकारात्मक बात है कि विलुप्ति की ओर बढ़ रहे गिद्धों की संख्या कांगड़ा में बढ़ रही है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार जिले में अब तक 1377 गिद्ध दर्ज किए गए हैं। यह संरक्षण प्रयासों की सफलता का परिणाम है और आगे भी गिद्धों के संरक्षण के लिए कदम उठाए जाएंगे।"

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