अमेरिका ने भारत की ऊर्जा नीतियों पर दिया समर्थन, कहा- विविधता जरूरी
न्यूयॉर्क/08/10/2025
न्यूयॉर्क: अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार नहीं है और देश अपनी ऊर्जा जरूरतों में विविधता ला रहा है। ग्रीर ने स्पष्ट किया कि नई दिल्ली अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेगी और वॉशिंगटन किसी देश को यह निर्देश नहीं दे रहा कि वे किसके साथ व्यापार करें। उन्होंने कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में रूस से तेल न केवल खपत के लिए, बल्कि रिफाइनिंग और पुनर्विक्रय के लिए भी कम दाम पर खरीदना शुरू किया है। ग्रीर ने यह भी कहा कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था का कोई आधारभूत हिस्सा नहीं है और भारत पहले ही विविधता की दिशा में कदम उठा चुका है।
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ में से आधा यानी 25 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ है और बाकी 25 प्रतिशत भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद में वृद्धि के कारण लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है और इस मामले में यूरोपीय सहयोगियों के साथ भी बातचीत जारी है। ग्रीर ने जोर देकर कहा कि अमेरिका केवल सुझाव दे सकता है, लेकिन भारत अपनी ऊर्जा नीतियों पर स्वतंत्र निर्णय लेने वाला संप्रभु देश है।
भारत ने हमेशा कहा है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हित और बाजार की गतिशीलता पर आधारित है। फरवरी 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद और पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाने के बाद भारत ने छूट पर बेचे जाने वाले रूसी तेल की खरीद शुरू की थी। ग्रीर के बयान से स्पष्ट हुआ कि अमेरिका अब भारत की इस नीति को समझता है और इसे उसकी स्वतंत्रता का हिस्सा मानता है।