आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत: 6 महीने की जमानत पर जेल से बाहर, इलाज के आधार पर मिली राहत
जोधपुर/29/10/2025
जोधपुर। अपने ही आश्रम की नाबालिग शिष्या से यौन उत्पीड़न के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू संत आसाराम को आखिरकार लंबी कानूनी लड़ाई के बाद राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। अदालत ने इलाज (Medical Grounds) के आधार पर आसाराम को 6 महीने की नियमित (रेगुलर) जमानत प्रदान की है। फिलहाल वह जोधपुर के एक निजी अस्पताल में उपचाराधीन हैं।
बुधवार को राजस्थान हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा की डिवीजन बेंच में आसाराम की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने उनकी उम्र, स्वास्थ्य की गंभीर स्थिति और लगातार बिगड़ते मेडिकल कंडीशन को देखते हुए यह राहत दी।
इलाज के लिए मिली राहत, पहली बार रेगुलर जमानत
आसाराम को इससे पहले सुप्रीम कोर्ट, राजस्थान हाईकोर्ट और गुजरात हाईकोर्ट से भी इलाज के लिए कई बार विशेष अंतरिम जमानत (Interim Bail) मिल चुकी थी, लेकिन यह पहली बार है जब उन्हें रेगुलर जमानत दी गई है। अदालत ने कहा कि छह महीने के भीतर अगर स्वास्थ्य में सुधार नहीं होता है, तो जमानत अवधि बढ़ाने के लिए नई याचिका दाखिल की जा सकती है।
2013 में हुआ था सनसनीखेज मामला दर्ज
गौरतलब है कि 15 अगस्त 2013 की रात को अपने जोधपुर आश्रम में आसाराम पर एक नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म का आरोप लगा था। पीड़िता ने घटना के पांच दिन बाद (20 अगस्त 2013) पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। इसके बाद जोधपुर पुलिस ने 1 सितंबर 2013 को इंदौर से आसाराम को गिरफ्तार किया और हवाई मार्ग से जोधपुर लाया गया।
गिरफ्तारी के बाद देशभर में आसाराम के समर्थकों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया था। कई स्थानों पर पुलिस और समर्थकों के बीच झड़पें भी हुईं
2018 में उम्रकैद की सजा, जेल में बीतीं कई कठिन साल
करीब पांच साल लंबी सुनवाई के बाद 25 अप्रैल 2018 को जोधपुर की अदालत ने आसाराम को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अदालत ने कहा था कि आसाराम को जिंदगी की आखिरी सांस तक जेल में रहना होगा। तब से वह जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं।
स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद बढ़ी कानूनी कोशिशें
पिछले कुछ वर्षों से आसाराम का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है। डॉक्टरों ने उन्हें कई बीमारियों से ग्रस्त बताया है, जिसके चलते उन्होंने बार-बार जमानत की अर्जी दी, लेकिन हर बार उनकी याचिका अलग-अलग आधारों पर खारिज होती रही।
आसाराम के वकीलों ने दलील दी थी कि “उनकी उम्र अधिक है, स्वास्थ्य गंभीर स्थिति में है, और जेल के वातावरण में उनका जीवन खतरे में है।” कोर्ट ने इन दलीलों पर विचार करते हुए छह महीने की राहत दी है।
समर्थकों में खुशी, विरोधियों में नाराज़गी
हाईकोर्ट के फैसले के बाद आसाराम के समर्थकों में उत्साह देखा जा रहा है। वहीं, पीड़िता के परिजनों और महिला संगठनों ने अदालत के फैसले पर निराशा जताई है। उनका कहना है कि “इससे पीड़िता को फिर से मानसिक आघात पहुंचेगा।”
छह महीने की जमानत अवधि पूरी होने के बाद यदि आसाराम की स्थिति पहले जैसी रहती है, तो वे पुनः जमानत बढ़ाने की अर्जी दाखिल कर सकते हैं। वहीं, राज्य सरकार के पास भी यह विकल्प है कि वह कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकती है।
आसाराम को फिलहाल मिली यह राहत अस्थायी है, लेकिन इसने एक बार फिर देशभर में न्याय और आस्था पर नई बहस को जन्म दे दिया है।