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बांग्लादेश की राजनीति में भूचाल —शेख हसीना के खिलाफ मौत की सजा की मांग,देश भर में अलर्ट और हिंसा के हालात

बांग्लादेश/17/11/2025

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बांग्लादेश आज सबसे निर्णायक और तनावपूर्ण दिन का सामना कर रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पर मानवता के विरुद्ध गंभीर आरोपों के केस में अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल (ICT-BD) आज फैसला सुनाने वाला है। यह वही मुकदमा है जिसमें अभियोजन पक्ष ने हसीना के लिए सीधे मृत्यु दंड की मांग की है। फैसले से पहले पूरे देश में माहौल खतरनाक रूप से गर्म हो गया है और हिंसा की लपटों ने ढाका और आसपास के इलाकों को चपेट में ले लिया है।

ढाका में सुरक्षा बलों को सीधे गोली चलाने की अनुमति देकर सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी मूल्य पर हालात बेकाबू नहीं होने दिए जाएंगे। ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस के आदेश के अनुसार, बसों या वाहनों में आग लगाने, पुलिस पर देसी बम फेंकने या जानलेवा हमला करने वालों को देखते ही गोली मारी जाएगी। कई जगहों पर पेड़ गिराकर हाईवे जाम किए गए, बसों में आग लगाई गई और कॉकटेल बम फेंके गए, जिसके बाद सेना, पुलिस और BGB को पूरे देश में तैनात कर दिया गया।

आज की सुनवाई को लेकर पारदर्शिता का दावा करते हुए सरकार ने पूरे फैसले का लाइव प्रसारण सुनिश्चित किया है। बांग्लादेश टेलीविजन पर सीधा प्रसारण होगा, जबकि ढाका में कई चौकों पर बड़े LED स्क्रीन लगाए गए हैं। ICT-BD ने यह बताया कि पिछले साल हुए आंदोलन में 1,400 मौतें और 25,000 घायल होने के आरोपों की पूरी जिम्मेदारी हसीना, असद-उज-जमां खान कमाल और तत्कालीन पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून पर तय की गई थी।

फैसले से पहले अवामी लीग ने एक बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि यह केस कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक राजनीतिक बदले की साजिश है। पार्टी ने कहा कि जांच से लेकर गवाहों तक, हर चरण में अनियमितताएं दिखीं—तेजी से की गई नियुक्तियां, संदिग्ध सबूत, तैयार गवाह और बचाव पक्ष पर कड़े प्रतिबंध। अवामी लीग के अनुसार यह मुकदमा सिर्फ तीन व्यक्तियों पर नहीं, बल्कि बांग्लादेश के लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों पर चुनौती है।

इसी बीच, अवामी लीग के फेसबुक पेज पर जारी एक भावनात्मक संदेश में शेख हसीना ने कहा कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है— “मैं जिंदा हूं, जिंदा रहूंगी और अपने लोगों का साथ देती रहूंगी।उन्होंने अंतरिम सरकार और नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस पर आरोप लगाया कि देश को उग्रवाद की ओर धकेला जा रहा है और अवामी लीग को मिटाने की साजिश लगातार जारी है। उन्होंने समर्थकों से शांत लेकिन दृढ़ होकर टकराव का सामना करने की अपील की।

हसीना फिलहाल नई दिल्ली में निर्वासन में हैं और पिछले अगस्त से वहीं रह रही हैं। उनके बेटे सजीब वाजेद ने कहा कि फैसले की दिशा उन्हें पहले से पता है और अदालत शायद उन्हें दोषी ठहरा दे। लेकिन उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत में उनकी मां को "एक राष्ट्राध्यक्ष जैसी सुरक्षा" मिली हुई है और कोई उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा सकता। सजीब ने चेतावनी दी कि अगर अवामी लीग पर लगा प्रतिबंध नहीं हटाया गया तो फरवरी में होने वाले आम चुनाव को किसी भी हालत में नहीं होने दिया जाएगा।

हसीना और असद-उज-जमां पर यह मुकदमा उनकी गैरमौजूदगी में चला और अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया। वहीं मामून ने पहले कोर्ट में पेशी दी थी लेकिन बाद में सरकारी गवाह बन गया। आरोपों में हत्या, हत्या का प्रयास, यातना और अमानवीय कृत्य शामिल हैं, जिन्हें मानवता के विरुद्ध अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

फैसले से कुछ घंटे पहले ढाका सहित कई शहरों में बम धमाके और आगजनी के बाद तनाव चरम पर है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे मोड पर खड़ी हैं और दुनिया की नज़रें इस ऐतिहासिक फैसले पर टिकी हैं, जो बांग्लादेश की राजनीति का भविष्य तय करेगा।

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