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भाई दूज 2025: यमराज और यमुना की कहानी से जुड़ा भाई-बहन का पर्व

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भाई दूज 2025 इस साल 22 अक्टूबर से शुरू होकर 23 अक्टूबर की रात समाप्त होगा। यह त्योहार भाई-बहन के प्रेम और अपनत्व का प्रतीक माना जाता है और पूरे भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। महाराष्ट्र में इसे भाऊ-बीज और पश्चिम बंगाल में भाई फोंटा के नाम से जाना जाता है। भाई दूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है और दिवाली के दो दिन बाद पड़ता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और समृद्धि की कामना करती हैं।

भाई दूज से जुड़ी सबसे प्रचलित पौराणिक कथा यमराज और उनकी बहन यमुना से संबंधित है। कथा के अनुसार, सूर्य की पत्नी संज्ञा की संतानें यमराज और यमुना थीं। संज्ञा के कठोर व्यवहार और सौतेलेपन से प्रभावित होकर यमराज ने यमपुरी बसाई, जबकि यमुना विश्रामघाट चली गईं। बाद में यमराज ने अपनी बहन को ढूंढ़ा और मिलने पर यमुना ने भाई की सेवा करते हुए उनसे वरदान लिया कि कार्तिक मास की द्वितीया को जो भी बहन भाई का आदर करेगी और जो भी भाई अपनी बहन की सेवा स्वीकार करेगा, उसे कभी डर का सामना न करना पड़े। यमराज ने यह वरदान स्वीकार किया और तभी से भाई दूज मनाने की परंपरा चली आ रही है।

इस दिन बहनें भाइयों का स्वागत आरती और तिलक से करती हैं, मिठाई खिलाती हैं और उनके स्वास्थ्य एवं लंबी उम्र की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहनों के जीवन की रक्षा का वचन देते हैं और उन्हें उपहार भेंट करते हैं। जिन बहनों के सगे भाई नहीं होते, वे किसी रिश्तेदार या अपने पालन-पोषित भाई के साथ भी यह पर्व मनाती हैं। भारत के विभिन्न हिस्सों में भाई दूज को मनाने की अलग-अलग रीति-रिवाज हैं, लेकिन इसका मूल उद्देश्य भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करना और प्रेम प्रदर्शित करना है।

इस साल भाई दूज 22 अक्टूबर 2025 को रात 8:16 बजे प्रारंभ होगा और 23 अक्टूबर को रात 10:46 बजे समाप्त होगा। इस दिन पूरे देश में भाई-बहन के बीच प्रेम और सम्मान के पर्व के रूप में आयोजन किया जाएगा।

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