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भारत ने ठुकराया था ट्रंप का मध्यस्थता प्रस्ताव: इशाक डार का बड़ा खुलासा

नई दिल्ली/17/09/2025

ishak dar

नई दिल्ली: पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि भारत ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा किए गए मध्यस्थता के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया था। डार के इस बयान से ट्रंप के बार-बार किए गए उस दावे की पोल खुल गई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका से मध्यस्थता की मांग की थी।

डार ने यह बात उस समय कही जब वे मई महीने में अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो से मिले थे। बातचीत के दौरान जब रूबियो ने भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता को लेकर सवाल किया, तो डार ने साफ कहा कि भारत किसी भी तरह की तीसरी पार्टी की भूमिका को स्वीकार नहीं करता। उन्होंने कहा कि भारत-पाक संबंधों पर अमेरिका मध्यस्थता करना चाहता था, लेकिन भारत ने इससे इनकार कर दिया।

डार ने यह भी कहा कि पाकिस्तान हमेशा से ही बातचीत के लिए तैयार रहा है, लेकिन इसके लिए वह किसी के आगे हाथ नहीं फैलाएगा। उन्होंने कहा, "हम द्विपक्षीय वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए भीख नहीं मांगेंगे।" उन्होंने यह भी दोहराया कि पाकिस्तान एक शांतिप्रिय देश है और वह भारत के साथ अच्छे संबंध चाहता है, लेकिन भारत का अड़ियल रवैया हर बार बाधा बनता है।

डार ने स्पष्ट रूप से बताया कि जब अमेरिकी विदेश मंत्री से मुलाकात हुई, तो उन्होंने यह मुद्दा उठाया कि भारत के साथ संबंध कैसे सुधारे जाएं। इस पर उन्होंने बताया कि भारत ने ट्रंप के मध्यस्थता प्रस्ताव को पहले ही ठुकरा दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की ओर से बार-बार टालमटोल की जाती रही है, जबकि पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे सहित सभी मुद्दों पर खुलकर बातचीत को तैयार है।

गौरतलब है कि ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान 30 से ज्यादा बार यह दावा किया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद सुलझाने के लिए उन्होंने मध्यस्थता की पेशकश की थी और भारत ने उनसे ऐसा करने के लिए कहा था। हालांकि भारत ने हर बार ट्रंप के इस दावे को झूठा और निराधार बताया। अब पाकिस्तान के ही वरिष्ठ नेता के बयान से यह साफ हो गया है कि भारत ने कभी अमेरिका से मध्यस्थता की मांग नहीं की थी।

इस बयान के बाद यह भी साफ हो गया है कि भारत की नीति हमेशा से स्पष्ट रही है – कि भारत और पाकिस्तान के बीच सभी मुद्दे द्विपक्षीय बातचीत से ही हल होंगे, न कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से।

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