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बिहार चुनाव 2025: भाजपा के छह जिले ‘मुक्त’, गठबंधन ने संभाला चुनावी मैदान

पटना/25/10/2025

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पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मी तेज हो गई है, लेकिन इस बार एक दिलचस्प राजनीतिक तस्वीर देखने को मिल रही है। चुनावी तैयारियों के बीच भाजपा ने राज्य के छह जिलों में कोई उम्मीदवार नहीं उतारा, जिससे ये जिले मतदान से पहले ही भाजपा मुक्त हो गए हैं। यह रणनीति गठबंधन की ताकत को बनाए रखने और सहयोगी दलों को प्राथमिकता देने के तहत अपनाई गई है।

भाजपा ने कुल 243 विधानसभा सीटों में से 101 सीटों पर ही चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। इन छह जिलों में मधेपुरा, खगड़िया, शेखपुरा, शिवहर, जहानाबाद और रोहतास शामिल हैं। इन जिलों में भाजपा के उम्मीदवार न होने के कारण एनडीए के सहयोगी दलों ने चुनावी जिम्मेदारी संभाली। वहीं कुछ जिलों में भाजपा ने सिर्फ एक-एक सीट पर ही अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जैसे सहरसा, लखीसराय, नालंदा, बक्सर और जमुई।

भाजपा ने यह रणनीति इसलिए अपनाई क्योंकि राज्य में गठबंधन (एनडीए) में जदयू, लोजपा और हम-आरएलएम जैसे दल भी चुनाव लड़ रहे हैं। सहयोगी दलों को प्राथमिकता देकर भाजपा ने यह संकेत दिया कि वह अकेले नहीं बल्कि गठबंधन के साथ मैदान में उतर रही है। भाजपा ने कुल 101 सीटों पर चुनाव लड़ा है, जबकि जदयू ने 101 सीटों पर, लोजपा (आर) को 29 सीटें और हम-आरएलएम को 6-6 सीटें दी गई हैं।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जिन जिलों में भाजपा ने उम्मीदवार नहीं उतारे हैं, वहां सहयोगी दलों की पकड़ मजबूत है, या राजनीतिक समीकरण ऐसे हैं कि पार्टी खुद मैदान में उतरने से बच रही है। वहीं, कुछ जिलों में भाजपा ने दबदबा बनाए रखा है। पश्चिम चंपारण में भाजपा ने आठ उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि पूर्वी चंपारण में सात। पटना जिले में 14 सीटों में से 7 पर भाजपा के उम्मीदवार हैं, जबकि दरभंगा, मुजफ्फरपुर, भोजपुर और मधुबनी की कुछ सीटों पर भी भाजपा ने अपने कैंडिडेट उतारे हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, भाजपा ने संसाधन-वितरण रणनीति अपनाकर अपने गठबंधन को संतुलित किया है। जिन जिलों में सिर्फ एक या दो सीटों पर पार्टी के उम्मीदवार हैं, वहां भाजपा ने आसान चुनावी जमीन तैयार की है, जबकि सहयोगी दलों को प्राथमिकता दी। इस तरह भाजपा ने चुनाव प्रबंधन और संसाधनों का केंद्रित उपयोग सुनिश्चित किया है।

बहरहाल, इस रणनीति का असर क्या होगा और यह गठबंधन को चुनाव में लाभ दिला पाएगी या नहीं, इसका फैसला वोटिंग और परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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