बिक्रम ठाकुर का आरोप — कर्मचारियों की नौकरियों पर मुख्यमंत्री की नजर, सरकार कर्मचारियों को ‘बोझ’ मान रही है
धर्मशाला। पूर्व उद्योग मंत्री एवं विधायक बिक्रम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि वर्तमान सरकार प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। उन्होंने कहा कि सुक्खू सरकार ने संवेदनहीनता की सारी सीमाएं पार कर दी हैं और अब सरकारी विभागों, बोर्डों व निगमों में पदों को खत्म करने पर तुली हुई है।
बिक्रम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के लगभग 250 पेंशनरों को अभी तक पेंशन नहीं मिली है और सितंबर माह की पेंशन भी अटकी हुई है। इसके अलावा 2016 के वेतनमान का एरियर, डीए और मेडिकल बिलों का भुगतान भी लंबे समय से लंबित है। उन्होंने कहा कि पेंशनरों को अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है, जो कांग्रेस सरकार की “नाकामी और निष्ठुर रवैये” को दर्शाता है।
पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि सरकार जहां अपने करीबी अधिकारियों को लाखों के वेतन पर पुनः नियुक्त कर रही है, वहीं सामान्य कर्मचारियों और पेंशनरों को “बोझ” मान रही है। उन्होंने कहा कि “सुक्खू सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों को बोझ समझ रही है, जबकि यही लोग प्रदेश की रीढ़ हैं।
बिक्रम ठाकुर ने यह भी कहा कि सरकार की “कुदृष्टि” अब महिलाओं को मिलने वाले 50% बस किराया छूट पर पड़ चुकी है। उन्होंने आशंका जताई कि यह सुविधा भी जल्द ही सरकार के निशाने पर आ सकती है। “यह वही सरकार है जो पहले योजनाओं की आलोचना करती है, फिर उन्हें बंद कर देती है — चाहे वह मुफ्त बिजली योजना हो, ग्रामीण क्षेत्रों में नि:शुल्क पानी, सहारा योजना या हिमकेयर,” उन्होंने कहा।
उन्होंने मुख्यमंत्री के हालिया मीडिया बयान की आलोचना करते हुए कहा कि “मुख्यमंत्री का यह कहना कि महिलाओं को दी जा रही 50% छूट से निगम को नुकसान हो रहा है और कर्मचारियों पर खर्च बढ़ा है — यह उनकी संकीर्ण सोच को दर्शाता है।
ठाकुर ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र ही पेंशन जारी नहीं की और एरियर व मेडिकल बिलों का भुगतान नहीं किया, तो कर्मचारी आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
उन्होंने कहा, “इतना निर्दयी और कर्मचारियों का विरोधी मुख्यमंत्री हिमाचल को पहले कभी नहीं मिला। यह सरकार न विकास कर पाई है, न वादे निभा पाई है, अब कर्मचारियों के अधिकारों को निगलने में जुटी है।