BMC चुनाव से पहले महाराष्ट्र में सियासी तूफ़ान — बिहार नतीजों के बाद उद्धव–कांग्रेस टकराव तेज
महाराष्ट्र/17/11/2025
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है। कांग्रेस द्वारा मुंबई बीएमसी चुनाव अकेले लड़ने की घोषणा के बाद अब शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि उनकी पार्टी कांग्रेस को मनाने के मूड में नहीं है और वह अपने फैसले खुद लेगी। यह बयान साफ संकेत देता है कि महाराष्ट्र में महागठबंधन के भीतर मनमुटाव बढ़ रहा है और बीएमसी चुनाव अब राजनीतिक प्रतिष्ठा की जंग बनते जा रहे हैं।
उद्धव ठाकरे ने बिहार चुनाव पर भी गंभीर सवाल उठाए, खासकर तेजस्वी यादव को मिले भारी समर्थन को लेकर। उन्होंने मांग की कि यह जांच होना जरूरी है कि तेजस्वी को मिला जनाधार वास्तविक था या कहीं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के जरिए जनसमर्थन “तैयार” तो नहीं किया गया। ठाकरे का यह बयान बताता है कि बिहार परिणाम विपक्षी राजनीति में नई बहस छेड़ सकते हैं।
उधर महाराष्ट्र कांग्रेस प्रभारी रमेश चेन्निथला और मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वरखा गायकवाड़ ने साफ किया है कि पार्टी 227 वार्डों में स्वतंत्र रूप से उम्मीदवार उतारेगी। कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई एमएनएस चीफ राज ठाकरे की बढ़ती नज़दीकियां भी पार्टी को असहज कर रही हैं। यह बदलता समीकरण कांग्रेस के लिए बीएमसी चुनाव में चुनौती बढ़ा रहा है।
इस बीच राज्य सरकार ने बीएमसी चुनाव से ठीक पहले ‘बालासाहेब ठाकरे राष्ट्रीय स्मारक सार्वजनिक ट्रस्ट’ का पुनर्गठन करते हुए उद्धव ठाकरे को फिर से इसका अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। 2019 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने यह पद छोड़ दिया था। नए गठन में बीजेपी विधायक पराग अलवानी, आदित्य ठाकरे और शिशिर शिंदे को भी शामिल किया गया है। यह ट्रस्ट शिवाजी पार्क में बनने वाले बाल ठाकरे स्मारक की देखरेख करता है।
बिहार नतीजों की गूंज अब मुंबई की राजनीति तक पहुंच चुकी है और बीएमसी चुनाव के चलते शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस के रिश्ते नए मोड़ ले रहे हैं। आने वाले दिनों में यह टकराव महाराष्ट्र की सियासी तस्वीर को और अधिक बदल सकता है।