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सीआईसी को मिला स्थायी दफ्तर और ऑनलाइन आरटीआई: जनता तक पारदर्शिता पहुंचाने में भाजपा सरकार की पहल

शिमला/12/10/2025

kashyap

शिमला: भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद सुरेश कश्यप ने हिमाचल प्रदेश में सूचना के अधिकार (RTI) की प्रक्रिया और अनुपालन को लेकर अहम जानकारी साझा की। कश्यप ने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार के तहत आरटीआई अपीलों का लगभग शत-प्रतिशत निपटारा हो रहा है और लंबित मामलों की संख्या हर साल लगातार घट रही है। उन्होंने बताया कि 2019-20 में लंबित अपीलों की संख्या 35,718 थी, जो 2021-22 में घटकर 29,213 और 2023-24 में 23,087 पर आ गई। 2024-25 में यह संख्या केवल 22,666 रह गई है, जो उल्लेखनीय सुधार माना जा रहा है।

सुरेश कश्यप ने यह भी कहा कि सीआईसी (सेंट्रल इंफॉर्मेशन कमिशन) को 2014 के बाद अपना स्वतंत्र कार्यालय परिसर मिला। इससे पहले आयोग किराए के कार्यालय में संचालित होता था। उन्होंने बताया कि हर साल सीआईसी में पहुंचने वाली लगभग 17,000 अपीलों का निपटारा किया जाता है। कश्यप ने यह भी कहा कि जो सरकार इतने बड़े विभाग को स्थायी दफ्तर नहीं दे सकती, वह जनता को आरटीआई के बारे में नसीहत देकर भ्रमित करने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने बताया कि सूचना आयोग ने नोडल अधिकारियों, केंद्रीय लोक सूचना अधिकारियों (CPIO) और प्रथम अपीलीय अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें बड़ी संख्या में अधिकारियों ने भाग लिया और उन्होंने आरटीआई अधिनियम और नियमों के अनुसार सूचना प्रदान करने में अपनी क्षमता बढ़ाई।

सुरेश कश्यप ने यूपीए शासन (2007-2014) और वर्तमान सरकार की तुलना करते हुए कहा कि यूपीए के सात वर्षों में अनुपालन दर लगभग 77% थी, जबकि भाजपा के सात वर्षों में यह 94% तक बढ़ गई। निपटान दर यूपीए शासन में 81.79% (1,32,406) रही, वहीं वर्तमान सरकार में यह बढ़कर 92% (1,60,643) हो गई है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आरटीआई को ऑनलाइन उपलब्ध कराने का श्रेय भी भाजपा सरकार को जाता है।

कश्यप ने अंत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण सरकार में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक केंद्रित शासन को बढ़ावा देना है। उनके नेतृत्व में सीआईसी और आरटीआई प्रक्रिया ने जनता तक सूचना पहुंचाने में उल्लेखनीय सुधार किया है।

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