दार्जिलिंग में भीषण बारिश और भूस्खलन से 23 लोगों की मौत, सैकड़ों पर्यटक फंसे
दार्जिलिंग/06/10/2025
पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी जिलों में भारी बारिश ने तबाही मचा दी है। लगातार मूसलाधार बारिश के कारण पहाड़ियों में भूस्खलन और पुल ढहने की घटनाएं हुईं, जिनमें अब तक कम से कम 23 लोगों की मौत हो चुकी है। कई लोग घायल हैं और सैकड़ों पर्यटक पहाड़ियों में फंसे हुए हैं।
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और जिला प्रशासन के अनुसार, जलपाईगुड़ी जिले के सरसली, जसबीरगांव, मिरिक बस्ती, धार गाँव, मिरिक झील और नागराकाटा में भारी नुकसान हुआ। दार्जिलिंग जिले में 18 लोगों की मौत हुई, जिनमें 11 मिरिक में और 7 दार्जिलिंग उपमंडल में हुई। जलपाईगुड़ी जिले के नागराकाटा में भूस्खलन से 5 शव बरामद किए गए। एनडीआरएफ के अधिकारी ने बताया कि मिरिक, दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी में कुल 23 मौतें हुई हैं।
उत्तर बंगाल विकास मंत्री उदयन गुहा ने स्थिति को चिंताजनक बताया और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई। गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनित थापा ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र में 35 स्थानों पर भूस्खलन की सूचना मिली है। इसे 2015 की भूस्खलन घटना के बाद सबसे भीषण बताया जा रहा है। मिरिक-सुखियापोखरी मार्ग और अन्य प्रमुख सड़कें अवरुद्ध हैं, जिससे सिलीगुड़ी और मिरिक के बीच संपर्क बाधित हो गया है, और लोहे का पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य सचिवालय नबन्ना में उच्च-स्तरीय बैठक कर 24x7 नियंत्रण कक्ष खोला और सोमवार को उत्तर बंगाल का दौरा करने का निर्णय लिया। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया और अस्थायी राहत शिविर स्थापित किए गए।
दार्जिलिंग सांसद और भाजपा नेता राजू बिष्ट ने राज्य स्तरीय आपदा घोषित करने का अनुरोध किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने जानमाल के नुकसान पर दुख व्यक्त किया और केंद्र से मदद की अपील की।
मौसम विभाग ने दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। साथ ही भूस्खलन और सड़क अवरोधों की चेतावनी दी गई। कूचबिहार और जलपाईगुड़ी के लिए रेड अलर्ट और दार्जिलिंग के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
यह आपदा 1968 के जलप्रलय और 1899 के विनाशकारी भूस्खलन की याद दिलाती है। राज्य सरकार ने आपातकालीन नियंत्रण कक्षों को हाई अलर्ट पर रखा है और सुरक्षा एजेंसियों व राज्य आपदा बल की अतिरिक्त टीमों को तैनात किया गया है।