राजधानी में बढ़ रही चिंता: इस साल अब तक 11,917 महिलाएं–बच्चियां लापता, आंकड़े चौंकाने वाले
दिल्ली/01/11/2025
राजधानी दिल्ली में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। आंकड़े बताते हैं कि इस साल 1 जनवरी से लेकर 15 अक्टूबर 2025 तक कुल 19,682 लोग लापता हुए, जिनमें से 11,917 महिलाएं और बच्चियां हैं। यानी हर दिन औसतन 41 महिलाएं या बच्चियां दिल्ली से गायब हो रही हैं। पुरुषों की संख्या 7,765 दर्ज की गई है, जो कुल मामलों का 39 प्रतिशत है। ये आंकड़े राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करते हैं।
दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक कुल लापता व्यक्तियों में से लगभग 55 प्रतिशत (10,780) को खोजा जा चुका है। इनमें 6,541 महिलाएं (61%) और 4,239 पुरुष (39%) शामिल हैं। वहीं, 4,854 बच्चे (25%) और 14,828 वयस्क (75%) लापता पाए गए। पिछले 10 वर्षों के रिकार्ड्स भी चौंकाने वाले हैं—2015 से 2025 के बीच दिल्ली से करीब 2.51 लाख लोग लापता हुए, जिनमें से 56 फीसदी महिलाएं (1,42,037) थीं।
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि लापता बच्चों में अधिकतर किशोरियां हैं। रिपोर्ट बताती है कि कुल लापता बच्चों में 72 फीसदी बच्चियां (3,509) और 28 फीसदी लड़के (1,345) हैं। 12 से 18 वर्ष की उम्र के किशोरों में यह समस्या सबसे अधिक है, जिसमें 78 फीसदी (3,258) बच्चियां शामिल हैं। हालांकि पुलिस अब तक 68 फीसदी बच्चियों और 72 फीसदी लड़कों को बरामद करने में सफल रही है।
कम उम्र के बच्चों का हाल भी चिंताजनक है। 0 से 8 वर्ष के बीच 304 बच्चे लापता हुए, जिनमें से 41 फीसदी बच्चियां और 59 फीसदी लड़के थे। इनमें से केवल लगभग 60 फीसदी बच्चियां और 51 फीसदी लड़के ही खोजे जा सके हैं। वहीं, 8 से 12 वर्ष के आयु वर्ग में 383 बच्चे लापता हुए, जिनमें से 74 फीसदी को अब तक ढूंढ लिया गया है।
इन आंकड़ों ने एक बार फिर दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं और किशोरियों की गुमशुदगी के पीछे मानव तस्करी, घरेलू झगड़े और साइबर अपराध जैसी वजहें भी हो सकती हैं। पुलिस का कहना है कि गुमशुदा लोगों की खोज के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं और परिवारों को तुरंत रिपोर्ट दर्ज कराने की अपील की जा रही है।