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दिल्ली विश्वविद्यालय ने हिमालयी आपदाओं पर शुरू किया शोध, फ्लैश फ्लड और ग्लेशियर संरक्षण की तैयारी

नई दिल्ली/28/09/2025

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नई दिल्ली: हिमालयी क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड और क्लाउड बर्स्ट जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे को देखते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय का हिमालय अध्ययन केंद्र सक्रिय रूप से शोध कर रहा है। उत्तराखंड के धराली जैसे क्षेत्रों में हाल ही में आई विनाशकारी घटनाओं ने केंद्र को चेतावनी दी है कि भविष्य में ऐसे जोखिमों से निपटने के लिए ठोस तैयारी आवश्यक है।

केंद्र के निदेशक प्रो. बिंध्य वासिनी पांडेय ने बताया कि ग्लेशियर पिघलने, झीलों के निर्माण और फ्लैश फ्लड जैसी आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए अनुसंधान किया जा रहा है। उनका कहना है कि “हम आपदाओं को रोक नहीं सकते, लेकिन उनके प्रभाव को कम करके लोगों की जान और संपत्ति बचा सकते हैं।”

प्रो. पांडेय ने समझाया कि हिमालय में पिघलते ग्लेशियर मलवे (मोरेन्स) का निर्माण करते हैं, जो पानी के प्रवाह को रोककर झील बनाते हैं। समय के साथ ये झीलें टूट सकती हैं और फ्लैश फ्लड का रूप ले लेती हैं, जिससे गांव, खेत और घर भारी नुकसान झेलते हैं। केंद्र पूर्वानुमान और निगरानी प्रणाली विकसित कर रहा है ताकि प्रभावित क्षेत्रों को समय पर खाली कराया जा सके और नुकसान कम हो।

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश पर विशेष शोध: चमोली और उत्तरकाशी के संवेदनशील क्षेत्रों में 2025-26 के लिए विशेष अनुसंधान केंद्रित है। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, धर्मशाला, कांगड़ा और किन्नौर में पहले ही गहन अध्ययन किया जा चुका है। 170 वर्षों के क्लाउड बर्स्ट डेटा का विश्लेषण कर पैटर्न तैयार किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग: हिमालय अध्ययन केंद्र यूजीसी, आईसीएसआर, जीबी पंत संस्थान, यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ (यूके) और स्विट्जरलैंड के संस्थानों के साथ मिलकर शोध कर रहा है। जिनेवा के अंतरराष्ट्रीय आपदा केंद्र से संबंधित जर्नल में हिमालय में आपदाओं के प्रभाव को कम करने के उपाय प्रकाशित किए गए हैं।

ग्लोबल वार्मिंग और ग्लेशियर पिघलना: ग्लोबल वार्मिंग, वनों की कटाई, औद्योगिकीकरण और परिवहन विस्तार से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ा है। इससे हिमालयी ग्लेशियर तेज़ी से पिघल रहे हैं और प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ गया है।

भारत की पहल: प्रो. पांडेय ने भारत सरकार की 2070 तक कार्बन न्यूट्रैल बनने की योजना की सराहना की। सोलर हब के विकास और उत्सर्जन घटाने के प्रयास भारत को वैश्विक स्तर पर मिसाल बना रहे हैं।

आपदा जोखिम न्यूनीकरण: जापान के सेंडाई फ्रेमवर्क के अनुसार, प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन उनके प्रभाव को कम किया जा सकता है। केंद्र इस दिशा में अनुसंधान कर हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और आजीविका बचाने का काम कर रहा है।

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