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डॉ राधा ने हिमालयी औषधीय पौधों पर चार पेटेंट दाखिल किए

सोलन| 21|08|2025

DR. RADHA

सोलन: शूलिनी विश्वविद्यालय ने सतत स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ बायोलॉजिकल एंड एनवायरनमेंटल साइंसेज में सहायक प्रोफेसर डॉ. राधा ने वर्ष 2025 में हिमालयी औषधीय पौधों से स्वास्थ्य उत्पाद तैयार कर चार महत्वपूर्ण पेटेंट दाखिल किए हैं। यह पहली बार है जब स्थानीय जनजातीय ज्ञान और पारंपरिक औषधीय पौधों को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर पर्यावरण-अनुकूल स्वास्थ्य उत्पादों के रूप में विकसित किया गया है।

डॉ. राधा द्वारा दाखिल पेटेंट्स में ऐसे पौधों और फूलों का उपयोग किया गया है जिनमें प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल गुण मौजूद हैं। इसमें एक पेटेंट औषधीय फूलों और फलों से बने सीमेल्ट आधारित पेय उत्पाद से संबंधित है, जो पोषक तत्वों से भरपूर है और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में सहायक है। दूसरा पेटेंट औषधीय फूलों के एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल गुणों पर आधारित है, जिनसे बनाए गए उत्पाद पर्यावरण-अनुकूल स्वास्थ्य सेवाओं में कारगर साबित होंगे।

तीसरा पेटेंट गिलोय (टीनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया) की पत्तियों पर आधारित है। इस पौधे के शीतलन और पुनर्स्थापनात्मक गुणों को आधुनिक खाद्य विज्ञान से जोड़ते हुए बायोएक्टिव यौगिकों का संरक्षित रूप प्रस्तुत किया गया है। इससे ऐसे उत्पाद विकसित किए जाएंगे जो हानिकारक बैक्टीरिया और दवा-प्रतिरोधी जीवाणुओं से लड़ने में सक्षम होंगे। चौथा पेटेंट नवोन्मेषी औषधीय पौधा-आधारित स्वास्थ्य उत्पाद से जुड़ा है, जिसमें विशेष रूप से विकसित हर्बल यूटिलिटीज शामिल हैं।

इस शोध कार्य को एडवांस्ड नेशनल रिसर्च फाउंडेशन, बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया (देहरादून) और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सहयोग से आगे बढ़ाया गया है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसे मान्यता मिल रही है। इस शोध से जुड़े वैज्ञानिक प्रयासों में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, ईस्ट केरोलाइना यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ वीगो (स्पेन) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का सहयोग शामिल है।

शूलिनी विश्वविद्यालय की यह उपलब्धि न केवल हिमालयी औषधीय पौधों की वैश्विक महत्ता को सामने लाएगी बल्कि स्थानीय जनजातीय ज्ञान और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को भी आधुनिक वैज्ञानिक शोध से जोड़कर नई दिशा देगी। इससे आने वाले समय में पर्यावरण-अनुकूल और सुरक्षित स्वास्थ्य उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा, जो समाज को सतत स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में सहायक होंगे।

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