चेक गणराज्य के राष्ट्रपति पेट्र पावेल ने आज भारत के लेह, लद्दाख में विश्व विख्यात तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा से मुलाकात की। यह मुलाकात विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही क्योंकि इस अवसर पर दलाई लामा अपना 90वां जन्मदिन मना रहे हैं। राष्ट्रपति पावेल ने उन्हें इस ऐतिहासिक क्षण पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं और विश्व में शांति, करुणा तथा अहिंसा के प्रचार के लिए उनके योगदान की सराहना की।
राष्ट्रपति पावेल का भारत दौरा: मानवीय संबंधों की नई मिसाल
यह दौरा कोई औपचारिक राजनयिक यात्रा नहीं थी, बल्कि एक आध्यात्मिक और मानवीय भावनाओं से प्रेरित मुलाकात थी। राष्ट्रपति पावेल वर्षों से दलाई लामा की शिक्षाओं और उनके विचारों से प्रभावित रहे हैं। उन्होंने कहा, “दलाई लामा केवल तिब्बती लोगों के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।” इस मुलाकात ने वैश्विक स्तर पर एक मजबूत संदेश दिया है – कि राजनेता भी करुणा और सह-अस्तित्व जैसे मूल्यों को प्राथमिकता दे सकते हैं।
दलाई लामा की सीख: करुणा, शिक्षा और शांति का मार्ग
दलाई लामा ने राष्ट्रपति पावेल का गर्मजोशी से स्वागत किया और दोनों के बीच मानवता, धार्मिक सहिष्णुता, और वैश्विक शांति जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। दलाई लामा ने अपने संदेश में कहा: “हम सब एक मानव परिवार का हिस्सा हैं। करुणा और संवाद ही आज के समय में सबसे बड़ी ज़रूरत है।”
90वां जन्मदिवस: लेह में भव्य आयोजन
दलाई लामा का 90वां जन्मदिन लेह में तिब्बती समुदाय और स्थानीय लद्दाखी लोगों द्वारा बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। पूरे क्षेत्र में पूजा-पाठ, भक्ति संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। राष्ट्रपति पावेल की उपस्थिति ने इस अवसर को और भी ऐतिहासिक बना दिया।
तिब्बत से लेकर पूरी दुनिया तक, दलाई लामा की पहचान
दलाई लामा 1959 से भारत में निर्वासित जीवन जी रहे हैं और धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) को उन्होंने अपना निवास बनाया है। लेकिन उनका प्रभाव भारत तक सीमित नहीं है — वे दुनिया भर में शांति, सहिष्णुता और करुणा के प्रतीक माने जाते हैं। उनके अनुयायी 100 से अधिक देशों में फैले हुए हैं, और उनकी शिक्षाएं धर्म, राजनीति और विज्ञान के बीच सेतु का कार्य करती हैं।