फ्रांस में हड़ताल और विरोध प्रदर्शन, एफिल टावर पर ताला
पेरिस/03/10/2025
फ्रांस में आर्थिक कटौती और सरकार की कठोर नीतियों के खिलाफ गुरुवार को व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। देशभर के 200 से अधिक शहरों और कस्बों में हजारों कार्यकर्ता, सेवानिवृत्त व्यक्ति, छात्र और आम नागरिक सड़कों पर उतरे। राजधानी पेरिस में प्लेस डी’इटाली से शुरू हुए मार्च ने पूरे शहर को हिला दिया और इसके कारण एफिल टावर को बंद कर दिया गया। फ्रांसीसी गृह मंत्रालय के अनुसार, पूरे देश में कम से कम 1,95,000 लोग प्रदर्शन में शामिल थे, जबकि यूनियनों का दावा है कि यह संख्या 10 लाख से अधिक तक पहुंच गई।
यह विरोध प्रदर्शन सीजीटी, एफडीपी और सीएफडीटी जैसी प्रमुख यूनियनों द्वारा बुलाए गए राष्ट्रव्यापी हड़ताल का हिस्सा है। प्रदर्शनकारियों का मुख्य नारा था: "धनी वर्गों पर अधिक टैक्स लगाओ, सार्वजनिक सेवाओं पर कटौती बंद करो!" वे सरकार की प्रस्तावित 44 अरब यूरो की कटौती योजना का विरोध कर रहे हैं, जिसमें दो सार्वजनिक अवकाश समाप्त करना और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर फ्रीज लगाने जैसे कदम शामिल हैं।
पेरिस में दोपहर 2 बजे प्लेस डी’इटाली से शुरू हुई रैली प्लेस वॉबन तक पहुंची। प्रदर्शनकारियों ने फ्लेयर्स जलाए, बैनर लहराए और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। एफिल टावर संचालन कंपनी ने पुष्टि की कि अधिकांश कर्मचारी हड़ताल पर हैं, इसलिए टावर को "राष्ट्रीय हड़ताल आंदोलन" के कारण बंद रखा गया। ऑनलाइन टिकट खरीदने वाले पर्यटकों को रिफंड का आश्वासन दिया गया।
यह विरोध प्रदर्शन पिछले महीने के 18 सितंबर के बड़े मार्च के बाद फिर से शुरू हुआ है, जब 5 लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतरे थे। फ्रांस में राजनीतिक अस्थिरता चरम पर है, क्योंकि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार बिना पूर्ण बहुमत के काम कर रही है और संसद में बजट बहस गतिरोध का शिकार है। यूनियनें आरोप लगाती हैं कि कटौती अमीरों को लाभ पहुंचाएगी, जबकि महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत आम नागरिकों को प्रभावित कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने एलवीएमएच के सीईओ बर्नार्ड अर्नोल्ट जैसे अरबपतियों के खिलाफ पोस्टर दिखाए, जिन पर टैक्स हेवन्स का इस्तेमाल करने का आरोप है।
पुलिस ने पूरे देश में 76,000 कानून प्रवर्तन अधिकारियों को तैनात किया है ताकि किसी भी हिंसा को रोका जा सके। पिछले प्रदर्शनों में धुआं, आगजनी और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया था। संसद में वर्ष के अंत तक बजट विधेयक पर बहस होगी, और यूनियनें और अधिक दबाव बनाने की योजना बना रही हैं।