महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री जयंती पर विशेष समारोह भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला में सम्पन्न
शिमला/02/10/2025
भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास शिमला में आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 156वीं जयंती और भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर एक विशेष समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर गांधीजी के विचारों और आदर्शों की प्रासंगिकता पर विस्तृत विमर्श हुआ।
स्वागत वक्तव्य और गांधीजी के विचार
समारोह का प्रारंभ स्वागत वक्तव्य से हुआ, जिसमें गांधीजी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों को मानवता की सर्वोच्च धरोहर बताया गया। गांधीजी का विश्वास था कि “सत्य से बड़ा कुछ नहीं” और “अहिंसा ही सबसे बड़ी शक्ति है।” उनका सम्पूर्ण जीवन न केवल स्वतंत्रता संग्राम में भारत के नेतृत्व का प्रतीक रहा, बल्कि सामाजिक समरसता, आत्मनिर्भरता और नैतिक साहस की अमूल्य धरोहर भी रहा।
प्रो. उमा अनंतानी का वक्तव्य
संस्थान की अध्येता प्रोफेसर उमा अनंतानी ने गांधीजी के विचारों के विविध आयामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गांधीजी ने राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ-साथ समाज में नैतिक चेतना और समानता को भी उतना ही महत्व दिया।
प्रो. बृजेन्द्र पाण्डेय का मुख्य वक्तव्य
इसके बाद वरिष्ठ अध्येता प्रोफेसर बृजेन्द्र पाण्डेय ने मुख्य वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि गांधीजी का सत्याग्रह केवल एक राजनीतिक उपकरण नहीं था, बल्कि आत्मबल और आस्था की शक्ति का प्रतीक था। प्रो. पाण्डेय ने कहा कि विश्व स्तर पर गांधीजी सत्य, अहिंसा और शांति के पर्याय हैं। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि लाल बहादुर शास्त्री ने गांधीजी की शिक्षाओं को आत्मसात कर सरलता, ईमानदारी और राष्ट्रप्रेम का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।
निदेशक प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी का अध्यक्षीय उद्बोधन
समारोह की अध्यक्षता कर रहे संस्थान के निदेशक प्रोफेसर हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि महात्मा गांधी का जीवन हमारे लिए सतत प्रेरणा है। उन्होंने कहा, “गांधीजी हमें बतलाते हैं कि सच्चा राष्ट्र निर्माण केवल सत्ता परिवर्तन से नहीं, बल्कि नैतिक उत्थान से संभव है।”
प्रो. चतुर्वेदी ने यह भी रेखांकित किया कि गांधीजी के विचारों को आत्मसात करना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने ग्राम स्वराज, आत्मनिर्भरता और स्वच्छता जैसे गांधीवादी विचारों को आज भी प्रासंगिक और आवश्यक बताया।
धन्यवाद ज्ञापन और समापन
समारोह का समापन संस्थान के सचिव श्री मेहरचन्द नेगी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन से हुआ। पूरे कार्यक्रम का संचालन जनसंपर्क अधिकारी अखिलेश पाठक ने किया।
इस अवसर पर संस्थान के अध्येता, सह-अध्येता, अधिकारी और कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।