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गया जी के पितृपक्ष मेले में विदेशी श्रद्धालुओं का जुटान, सनातन संस्कृति से प्रभावित होकर किया पिंडदान

गया/19/09/2025

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बिहार के गया जी में इन दिनों चल रहे विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले 2025 में इस बार एक खास नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी को हैरान और भावुक कर दिया। यहां रूस, अमेरिका, स्पेन और यूक्रेन जैसे देशों से आए विदेशी श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान से अपने पितरों की आत्मा की मुक्ति के लिए पिंडदान किया। विष्णुपद मंदिर परिसर में 14 महिलाएं और 3 पुरुष पिंडवेदी पर बैठे दिखे, जो मंत्रोच्चार के साथ कर्मकांड कर रहे थे। उनके मुख से गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और विष्णु मंत्र की ध्वनि गूंज रही थी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद स्थानीय लोग और अन्य तीर्थयात्री भी भावविभोर हो उठे।
इन विदेशी श्रद्धालुओं का कहना है कि वे महज पर्यटन के लिए नहीं आए हैं, बल्कि लंबे समय से सनातन संस्कृति और उसके मंत्रों पर गहन अध्ययन कर रहे थे। शोध के दौरान उन्होंने पाया कि मंत्रोच्चार का गहरा आध्यात्मिक और मानसिक प्रभाव होता है। इसी वजह से उन्होंने पिंडदान करने का निर्णय लिया और गया जी पहुंचकर फल्गु नदी, सीता कुंड, प्रेतशिला, रामशिला, काकबली और विष्णुपद जैसे पवित्र स्थलों पर विधि-विधान से श्राद्ध किया। शुक्रवार को वे अक्षयवट और अन्य वेदियों पर भी पिंडदान करेंगे।

रूस की श्रद्धालु ओदा ने मीडिया के सामने गायत्री मंत्र सुनाकर सभी को चौंका दिया। उन्होंने कहा कि इन मंत्रों से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि का संचार होता है। आचार्य अभिनव सिंह ने बताया कि ये विदेशी श्रद्धालु वर्षों से सनातन संस्कृति से प्रभावित हैं। अपने घरों में शिवलिंग स्थापित कर पूजा करते हैं, शाकाहारी जीवन अपनाए हुए हैं और उन्हें विष्णु, गायत्री, महामृत्युंजय और गणेश मंत्र कंठस्थ हैं।

इन श्रद्धालुओं ने गले में रुद्राक्ष की माला, ललाट पर तिलक धारण किया और हर मंत्रोच्चार के साथ “ॐ श्री विष्णुये नमः” का जाप किया। उनकी आस्था देखकर गयापाल पंडा समाज भी गौरवान्वित हुआ। पंडा बंधुलाल टईया ने कहा कि यह पहली बार है जब इतने विदेशी इस प्रकार पिंडदान के लिए आए हैं। उनकी श्रद्धा और विश्वास गयाजी की आध्यात्मिक महिमा को और बढ़ा रहे हैं।

पितृपक्ष मेले में विदेशी श्रद्धालुओं की इस भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि सनातन संस्कृति और भारतीय परंपरा केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह विश्व स्तर पर लोगों के जीवन और आस्था का हिस्सा बन रही है।

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