NEWS CHOICE

निष्पक्ष खबर, बेबाक अंदाज

औंधे मुंह गिर सकते हैं सोने-चांदी के दाम, निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह

sona chandi

बीते कुछ महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में बेतहाशा तेजी देखने को मिली है, लेकिन अब बाजार में एक नया डर पैदा हो गया है। जहां निवेशक अब तक इन धातुओं की चमक में डूबे हुए थे, वहीं अब वेल्थ मैनेजमेंट फर्म PACE 360 के को-फाउंडर और चीफ ग्लोबल स्ट्रैटेजिस्ट अमित गोयल ने बड़ा अलर्ट जारी किया है। उन्होंने कहा है कि मौजूदा तेजी एक ‘रिफ्लेशनरी बबल’ है, जो जल्द ही फट सकता है और निवेशकों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।

अमित गोयल का मानना है कि यह तेजी अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। उनके अनुसार, आने वाले 12 महीनों में सोने की कीमतों में 30-35% और चांदी में 50% तक की गिरावट देखने को मिल सकती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 2007-08 की फाइनेंशियल क्राइसिस और 2011 के मेटल क्रैश के दौरान भी इसी तरह की रैली आई थी, जिसके बाद बाजार में भारी करेक्शन देखा गया था।

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब $4,000 प्रति औंस और चांदी लगभग $50 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही है। ये दोनों स्तर निवेशकों के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं। लेकिन गोयल के मुताबिक, यहीं से बिकवाली की शुरुआत हो सकती है। उन्होंने बताया कि पिछले चार दशकों में केवल दो बार ऐसा हुआ जब सोना और चांदी इस स्तर तक पहुंचे और डॉलर इंडेक्स कमजोर रहा — दोनों ही बार इसके बाद दामों में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई थी।

गोयल का अनुमान है कि अगले एक साल में गोल्ड की कीमतें गिरकर $2,600–$2,700 प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं, जबकि सिल्वर की कीमत आधी तक घट सकती है। उन्होंने कहा कि यह गिरावट लंबे समय के निवेशकों के लिए एक बेहतरीन अवसर साबित होगी, क्योंकि करेक्शन के बाद बाजार स्थिर होगा और वहां से नई रैली शुरू हो सकती है।

इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले 2 से 3 सालों में वैश्विक अर्थव्यवस्था, खासकर अमेरिका, मंदी की चपेट में आ सकता है। अगर ऐसा होता है, तो चांदी की औद्योगिक मांग में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है। उन्होंने कहा कि सोलर पैनल, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर जैसे उद्योगों में मांग घटने से चांदी की खपत कम होगी, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ेगा और उसकी चमक फीकी पड़ सकती है।

गोयल ने निवेशकों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि फिलहाल मुनाफावसूली का समय है, न कि नया निवेश करने का। उनके अनुसार, यह रैली कुछ और हफ्तों या महीनों तक चल सकती है, लेकिन यह टिकाऊ नहीं है। उन्होंने कहा कि असली निवेश का समय तब आएगा, जब बाजार करेक्शन के बाद नीचे जाकर स्थिरता बनाएगा और वहां से नई मजबूती की शुरुआत होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोना-चांदी की कीमतों में तेज गिरावट संभव है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला करने के बजाय सावधानी बरतनी चाहिए और सही मौके का इंतजार करना ही बेहतर रहेगा।

Scroll to Top