राज्यपाल ने रचनात्मक समालोचना पर जोर देते हुए भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का किया आह्वान
नई दिल्ली/17/09/2025
नई दिल्ली। भारत के राज्यपाल श्री शिव प्रताप शुक्ल ने कहा है कि यदि भारतीय राजनीति में केवल दोषारोपण की बजाय रचनात्मक समालोचना को अपनाया जाए, तो भारत वर्ष 2047 से पहले विकसित राष्ट्र बन सकता है। यह बात उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिवस पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन एवं पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कही। कार्यक्रम का आयोजन नरेंद्र मोदी अध्ययन केंद्र द्वारा इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में किया गया।
सम्मेलन का विषय था "विकसित भारत/2047: समावेशी विकास, सामाजिक न्याय और सतत विकास के लिए रोडमैप"। राज्यपाल ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पिछले 11 वर्षों में देश में हुए परिवर्तन की सराहना करते हुए कहा कि विकास केवल शासन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि योजनाओं और नीतियों को आम नागरिक के जीवन से जोड़ते हुए एक व्यापक जन आंदोलन बन गया। उन्होंने आत्मनिर्भरता, नवाचार, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण, स्वच्छ ऊर्जा और वैश्विक सहयोग के प्रयासों को प्रेरणादायी बताया।
राज्यपाल ने जीएसटी परिषद की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि संसद में कई बार बहिष्कार के बावजूद जीएसटी परिषद ने सर्वसम्मति से कर संरचना में सुधार किया, जो एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना का उदाहरण है। उन्होंने प्रधानमंत्री की जनधन योजना का भी उल्लेख किया, जिसमें जीरो बैलेंस खातों के माध्यम से बैंकिंग सेवाओं को लोगों के दरवाजे तक पहुँचाया गया। एक वर्ष के भीतर कुल जमा राशि करीब 56 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो प्रधानमंत्री की भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश में नशामुक्त अभियान की शुरुआत का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं को नशे से बचाना प्रदेश के भविष्य के लिए आवश्यक है। इस अभियान पर आज लगभग हर पंचायत में चर्चा हो रही है।
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने प्रधानमंत्री पर आधारित सात पुस्तकों का विमोचन भी किया। इस अवसर पर असम के पूर्व राज्यपाल श्री जगदीश मुखी, हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो टंकेश्वर कुमार, लेखक एवं सर्वार्थ सेवा फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. बसन गोयल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।