H1B वीजा पर आए भारतीयों को तुरंत लौटने की जरूरत नहीं: अमेरिकी प्रशासन की सफाई
वॉशिंगटन/21/09/2025
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एच-1बी वीजा को लेकर की गई घोषणा से भारतीय आईटी पेशेवरों और टेक कंपनियों के बीच चिंता की लहर दौड़ गई थी। ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी कंपनियों पर एच-1बी वीजा धारक प्रत्येक विदेशी कर्मचारी के लिए $100,000 (लगभग 83 लाख रुपये) का वार्षिक शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है।
इस फैसले को अमेरिका में रोजगार के अवसरों को स्थानीय नागरिकों के लिए आरक्षित करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया गया। हालांकि, इस घोषणा के बाद अफवाह फैल गई कि अमेरिका में पहले से रह रहे H1B वीजा धारकों को जल्द से जल्द देश छोड़ना होगा। इसी भ्रम को दूर करते हुए अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव केवल नई वीजा अप्लिकेशनों पर लागू होगा, न कि पहले से कार्यरत वीजा धारकों या वीजा नवीनीकरण करने वालों पर।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि वर्तमान H1B वीजा धारकों को अमेरिका से बाहर जाने की कोई आवश्यकता नहीं है, जिससे लाखों भारतीय पेशेवरों को राहत मिली है। गौरतलब है कि अमेरिका में 70% H1B वीजा धारक भारतीय हैं, इसलिए इस फैसले का असर सबसे अधिक भारत पर पड़ने की आशंका थी।
ट्रंप की इस घोषणा के बाद Microsoft, Amazon, Meta और JP Morgan जैसी प्रमुख टेक कंपनियों ने अपने भारतीय कर्मचारियों को मेल भेजकर सतर्क कर दिया था कि यदि वे 21 सितंबर 2025 की आधी रात तक अमेरिका नहीं लौटते, तो उनकी नौकरियों पर संकट आ सकता है। हालांकि अब प्रशासन की सफाई के बाद कंपनियों ने स्थिति को स्पष्ट किया है और कर्मचारियों से संयम बनाए रखने की अपील की है।
ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित इस प्रस्ताव के तहत अब एच-1बी वीजा शुल्क को बढ़ाकर अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेशी श्रमिकों की नियुक्ति महंगी बना दी गई है। इस कदम की आलोचना करते हुए विशेषज्ञों ने कहा है कि यह अमेरिका की तकनीकी प्रतिस्पर्धा और वैश्विक टैलेंट को आकर्षित करने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है।
फिर भी ट्रंप इसे अपने "अमेरिका फर्स्ट" अभियान का हिस्सा मानते हुए चुनावी मजबूती के तौर पर पेश कर रहे हैं। कुल मिलाकर, अब यह स्पष्ट हो गया है कि H1B वीजा धारक भारतीयों को अमेरिका छोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है, और नया शुल्क केवल नई वीजा नियुक्तियों पर लागू होगा।