हरियाणा की MDU यूनिवर्सिटी में अमानवीय व्यवहार: महिला स्टाफ से पीरियड्स का सबूत मांगकर उतरवाए कपड़े, महिला आयोग ने मांगी रिपोर्ट
रोहतक/30/10/2025
हरियाणा की महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU) में इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां महिला सफाई कर्मचारियों से उनके पीरियड्स का सबूत मांगा गया और कपड़े उतरवाकर फोटो खिंचवाई गईं। घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने दो सुपरवाइजरों — विनोद और जितेंद्र — को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं, हरियाणा महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया ने इस पूरे प्रकरण पर सख्त रुख अपनाते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस से रिपोर्ट तलब की है।
यह घटना 26 अक्तूबर की बताई जा रही है। उस दिन विश्वविद्यालय में राज्यपाल के कार्यक्रम की तैयारियां चल रही थीं। इसी बीच दो महिला सफाई कर्मचारी काम पर देरी से पहुंचीं। जब उन्होंने सुपरवाइजरों को बताया कि वे माहवारी की परेशानी से गुजर रही हैं, तो उन पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए सुपरवाइजरों ने कपड़े उतरवाने और सेनेटरी पैड की फोटो व वीडियो बनवाने जैसी शर्मनाक हरकत की। बताया जा रहा है कि एक महिला कर्मचारी से बाकी कर्मचारियों के कपड़े उतरवाकर वीडियो बनवाई गई, जिसे देखकर सुपरवाइजरों ने यकीन किया कि वे सच कह रही थीं।
इस अपमानजनक व्यवहार से आक्रोशित महिला कर्मचारियों ने कैंपस में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, और थोड़ी ही देर में मामला पूरे विश्वविद्यालय में फैल गया। कई छात्र संगठनों ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर विरोध दर्ज कराया।
घटना की जानकारी मिलते ही महिला कर्मचारियों ने इस मामले में हरियाणा महिला आयोग और मानवाधिकार आयोग को लिखित शिकायत भेजी। आयोग ने इस पर स्वयं संज्ञान (सुओ मोटो) लेते हुए रोहतक के पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर विस्तृत कार्यवाही रिपोर्ट मांगी है।
रेनू भाटिया ने इस मामले को “बेहूदगी की सारी हदें पार करने वाला” बताया। उन्होंने कहा, “किसी महिला से पीरियड्स का सबूत मांगना और उसकी फोटो खींचना शर्मनाक और अमानवीय है। ऐसे लोगों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।”
इस पूरे विवाद के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोनों सुपरवाइजरों को 27 अक्तूबर को सस्पेंड कर दिया। आदेश में कहा गया है कि दोनों निलंबन अवधि के दौरान रोहतक मुख्यालय में रहेंगे और मामला इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी को आगे की कार्यवाही के लिए भेजा गया है।
इस पूरे मामले ने हरियाणा में महिला सुरक्षा और कार्यस्थल पर गरिमा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि दोषियों पर सिर्फ सस्पेंशन नहीं, बल्कि कानूनी कार्रवाई भी की जाए ताकि भविष्य में किसी महिला के साथ ऐसा व्यवहार न दोहराया जाए।