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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: दूसरी शादी के बाद भी पत्नी को पेंशन, VRS लेने वाला भी पेंशन का हकदार

शिमला/20/09/2025

court aadesh

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी की पहली पत्नी की मृत्यु हो जाती है, तो उसकी दूसरी पत्नी भी पारिवारिक पेंशन की हकदार होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि पारिवारिक पेंशन विधवा का अधिकार है, कोई कृपा या दया नहीं।

मामले की पूरी जानकारी:

यह मामला एक याचिकाकर्ता महिला से संबंधित था, जिसके पति की 1984 में मृत्यु हो गई थी। उसके पति ने 1978 में दूसरी शादी की थी, क्योंकि पहली पत्नी का निधन हो गया था। सरकार द्वारा पेंशन नियमों का हवाला देते हुए दूसरी पत्नी को पारिवारिक पेंशन से वंचित कर दिया गया था। सरकार ने यह तर्क दिया कि नियमों के अनुसार, पेंशन केवल पहली पत्नी या कानूनी उत्तराधिकारी को ही मिल सकती है।

हाईकोर्ट का फैसला:

न्यायाधीश सत्येन वैद्य ने सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब पहली पत्नी का निधन हो गया, तो दूसरी पत्नी कानूनी रूप से पत्नी की जगह ले लेती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता के पास अपने परिवार का पालन-पोषण करने का कोई साधन नहीं है। इसलिए, पेंशन से वंचित करना गलत है। हाईकोर्ट ने अधिकारियों को छह सप्ताह के भीतर महिला को पेंशन जारी करने का निर्देश दिया और कहा कि पिछले सभी बकाया का भुगतान भी किया जाए।

स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाला व्यक्ति दोबारा नौकरी का हकदार

एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने वाले व्यक्ति के मामले में भी स्थिति स्पष्ट की है। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेता है और बाद में किसी अन्य विभाग में स्वतंत्र क्षमता के आधार पर नियुक्त होता है, तो वह दोनों जगहों से पेंशन का हकदार होगा। मामले की पूरी जानकारी:

यह मामला एक व्यक्ति से संबंधित था, जिसने 2003 में जल शक्ति विभाग से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी। बाद में, उसे 2020 में ग्रामीण विकास विभाग में सहायक अभियंता के रूप में दोबारा नियुक्त किया गया। सरकार ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह दोहरी पेंशन नहीं ले सकता।

हाईकोर्ट का फैसला:

हाईकोर्ट ने सरकार के इस तर्क को भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का मतलब कर्मचारी और नियोक्ता के बीच का समझौता है, जहाँ कर्मचारी अपनी सेवा समाप्त करने के लिए सहमत होता है। इसके बाद, वह एक सामान्य नागरिक की तरह होता है। यदि वह किसी अन्य विभाग में स्वतंत्र रूप से काम करता है, तो उसे उस सेवा के लिए भी पेंशन मिलनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यह दो अलग-अलग सेवाएं हैं, और दोहरी पेंशन पर कोई रोक नहीं है।

इन दोनों फैसलों से यह स्पष्ट होता है कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारियों और उनके परिवारों के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण और प्रगतिशील निर्णय दिए हैं।

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