हिमाचल कैबिनेट के बड़े फैसले: इलेक्ट्रिक टैक्सी, शिक्षकों को राहत और सौर ऊर्जा से विकास को नई उड़ान
शिमला | मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में शनिवार को हुई हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा और रोजगार से जुड़े अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जो राज्य के विकास को नई दिशा देंगे।
बैठक में राजीव गांधी स्वरोजगार योजना के अंतर्गत 1000 मौजूदा डीज़ल व पेट्रोल टैक्सियों को इलेक्ट्रिक टैक्सियों से बदलने की अनुमति दी गई। इस योजना के तहत वाहन मालिकों को 40 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी।
विशेष पुलिस अधिकारियों के मानदेय में 1 अप्रैल 2025 से ₹300 प्रति माह की वृद्धि को मंजूरी दी गई, जिससे 510 अधिकारी लाभान्वित होंगे। वहीं, एसएमसी शिक्षकों, आईटी कंप्यूटर शिक्षकों, मिड-डे-मील कार्यकर्ताओं और अंशकालिक जलवाहकों के मानदेय में ₹500 की बढ़ोतरी की गई।
कृषि क्षेत्र के लिए भी बड़ा निर्णय लेते हुए मंत्रिमंडल ने प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना और हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण परियोजना (जाइका चरण-2) की निगरानी प्रणाली को और प्रभावी बनाने को स्वीकृति दी।
बैठक में राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों को नियमित करने के लिए नई दिशा-निर्देश नीति पर काम करने हेतु राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में एक उप-समिति गठित की गई।
खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने के लिए कैबिनेट ने 19 नए खेलों को सरकारी नौकरियों के लिए योग्य खेलों की सूची में शामिल किया, जिनमें रग्बी, मल्लखंभ, पैरा स्पोर्ट्स, कूडो, पेंचक सिलेट, किकबॉक्सिंग आदि शामिल हैं।
स्वास्थ्य विभाग में भी कई अहम निर्णय हुए। कैबिनेट ने नाहन मेडिकल कॉलेज के विस्तार कार्य को मंजूरी दी और आईजीएमसी शिमला, टांडा, नेरचौक और हमीरपुर मेडिकल कॉलेजों से 32 सहायक प्रोफेसरों के पद आपातकालीन चिकित्सा विभाग में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। साथ ही, नई रेजिडेंट डॉक्टर्स नीति–2025 को भी मंजूरी दी गई।
राज्य के अनुबंध पुरुष कर्मचारियों को 15 दिन का पितृत्व अवकाश देने की अनुमति दी गई, जबकि सोलन जिले में तीन नए प्राथमिक विद्यालयों को खोलने का निर्णय लिया गया।
ऊर्जा क्षेत्र में कैबिनेट ने राजीव गांधी स्वरोजगार सौर ऊर्जा योजना को मंजूरी दी। इस योजना के तहत जनजातीय क्षेत्रों में 5% और गैर-जनजातीय क्षेत्रों में 4% ब्याज अनुदान के साथ 100 किलोवाट से 2 मेगावाट तक की सौर परियोजनाएं स्थापित की जा सकेंगी।
बैठक में डॉ. यशवंत सिंह परमार विद्यार्थी ऋण योजना में भी संशोधन किया गया, जिसके तहत अब स्नातकोत्तर शिक्षा के लिए 1% ब्याज दर पर ऋण सुविधा उपलब्ध होगी और परिवार की आय सीमा ₹4 लाख से बढ़ाकर ₹12 लाख रुपये कर दी गई है।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन निवेश संवर्धन परिषद की स्थापना की मंजूरी दी गई, जो निवेश को पारदर्शी और तेज़ी से आकर्षित करने में मदद करेगी।
इसके साथ ही, मंत्रिमंडल ने फार्मा उद्योग में उपयोग होने वाले स्पिरिट की सप्लाई के लिए हिमाचल प्रदेश सामान्य उद्योग निगम को नोडल एजेंसी घोषित करने का निर्णय भी लिया।
इस बैठक के फैसलों से स्पष्ट है कि हिमाचल सरकार राज्य के विकास, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं के रोजगार को लेकर एक समग्र दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रही है।