हिमाचल के दवा उद्योग को तगड़ा झटका — कैंसर से लेकर सामान्य सर्दी की दवाएं तक गुणवत्ता जांच में फेल
सोलन/22/11/2025
हिमाचल प्रदेश में दवा निर्माण इकाइयों की गुणवत्ता एक बार फिर कठघरे में है। अक्टूबर महीने की ड्रग अलर्ट रिपोर्ट में देशभर से लिए गए 211 दवाओं के सैंपलों में से सबसे ज्यादा, कुल 66 सैंपल, हिमाचल की फैक्ट्रियों से संबंधित पाए गए और ये सभी गुणवत्ता मानकों पर असफल रहे। हैरान करने वाली बात यह है कि फेल हुई दवाओं में कैंसर, हार्ट अटैक, संक्रमण, मधुमेह, बुखार, एलर्जी और सर्दी–जुकाम जैसी गंभीर बीमारियों में उपयोग की जाने वाली दवाएं भी शामिल हैं।
राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला में जांचे गए 49 सैंपल और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा टेस्ट किए गए 17 सैंपल गुणवत्ता के मानकों को पूरा करने में नाकाम रहे। ये दवाएं मुख्य रूप से बद्दी, सोलन, नालागढ़, काला-अंब, पांवटा साहिब और कांगड़ा के संसारपुर टेरेस में स्थित फार्मा इकाइयों में बनाई गई थीं। राज्य ड्रग कंट्रोलर मनीष कपूर ने बताया कि संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं और उनके लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। साथ ही, बाजार में उपलब्ध स्टॉक वापस मंगवाया जा रहा है ताकि मरीजों तक खराब दवाएं न पहुंच सकें।
जांच के दौरान कई नामी ब्रांडों की दवाएं भी मानक पर खरी नहीं उतरीं। इनमें एजोट लाइफ साइंस की बुखार की दवा, जी लैब्स की हार्ट अटैक और मधुमेह की दवाएं, नैक्सी लैब और प्रोटेक टेलीलिंग की एनेस्थीसिया दवाएं, हिल्लर लैब का कैल्शियम सप्लीमेंट, डच फार्मा की गैस्ट्रिक दवा और गोलिश रेमीडीज की खांसी–बलगम से जुड़ी दवाएं शामिल हैं। इसके अलावा अल्ट्रा ड्रग, हसरस बायोटेक, एसिपन, मेयर लैब, मयासा, मायो फोर्ड, एमेस्टर, एक्सपेस, एथन लाइफ साइंस, जीएम लैब, लिगल लैब और एलवी लाइफ साइंस जैसी कंपनियों के उत्पाद भी जांच में असफल पाए गए।
इसी तरह, चंबाघाट की माया फोर्ड, बद्दी स्थित शेरवोट, चंवा की माइक्रो फार्मा, दवनी की एक्मे, नालागढ़ की बायोडेल, खरुणी की बीटा ड्रग—जिसकी कैंसर की दो दवाएं फेल हुईं—सोलन की जेनिस फार्मा, नालागढ़ की मायाश और काठा की वाईएल फार्मा के सैंपल भी मानकों पर खरे नहीं उतर सके। लगातार बढ़ रहे ऐसे मामलों ने हिमाचल के दवा उद्योग की विश्वसनीयता पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है।