हिमाचल में सख्त होगा डिजिटल अनुशासन: झूठी खबर फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म होंगे जवाबदेह – संशोधित आईटी अधिनियम लागू करने की तैयारी शुरू
शिमला/01/11/2025
शिमला। अब हिमाचल प्रदेश में सोशल मीडिया पर झूठी या भ्रामक खबरें फैलाने वालों की खैर नहीं। केंद्र सरकार द्वारा संशोधित सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम को प्रदेश में लागू करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य डिजिटल माध्यमों में पारदर्शिता, जवाबदेही और फेक न्यूज़ पर सख्त नियंत्रण सुनिश्चित करना है।
भारत सरकार ने 22 अक्तूबर को इस संशोधित अधिनियम की अधिसूचना जारी की थी और सभी हितधारकों से 6 नवंबर तक सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इसी क्रम में हिमाचल सरकार ने भी अधिनियम के बिंदुओं पर गंभीरता से मंथन शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के आईटी सलाहकार गोकुल बुटेल ने बताया कि प्रदेश सरकार जल्द ही केंद्र को अपने सुझाव भेजेगी। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को राज्य की संवेदनशीलता और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर प्रस्ताव तैयार करने का दायित्व सौंपा गया है।
संशोधित प्रावधानों के अनुसार अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अपनी प्रकाशित सामग्री के लिए सीधे तौर पर जवाबदेह होंगे। यदि किसी प्लेटफॉर्म पर झूठी या भ्रामक खबरें, एडिटेड वीडियो या अफवाहें प्रसारित की जाती हैं, तो कार्रवाई केवल उस व्यक्ति पर ही नहीं बल्कि संबंधित कंपनी पर भी की जाएगी।
सरकार इसके लिए एक फैक्ट-चेकिंग यूनिट गठित करेगी, जो सरकारी और सार्वजनिक सूचनाओं की सटीकता की जांच करेगी। यह यूनिट यह सुनिश्चित करेगी कि जनता तक पहुंचने वाली जानकारी सत्य और प्रमाणित हो।
प्रदेश सरकार का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ और अफवाहों के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है, जिससे कई बार सामाजिक तनाव और प्रशासनिक मुश्किलें उत्पन्न हुई हैं। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार एक राज्य स्तरीय डिजिटल निगरानी तंत्र (Monitoring Mechanism) बनाने की दिशा में भी विचार कर रही है।
यह तंत्र आईटी विभाग, पुलिस, जनसंपर्क विभाग और जिला प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करेगा ताकि किसी भी फेक न्यूज़ या भ्रामक पोस्ट पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
संशोधित एक्ट में यह भी प्रावधान है कि फेक या भ्रामक सामग्री पोस्ट करने वालों पर जुर्माना और कारावास दोनों का प्रावधान होगा। सोशल मीडिया कंपनियों को शिकायत मिलने के बाद तय समय सीमा में उस सामग्री को हटाना होगा। बार-बार झूठी खबरें फैलाने वालों के अकाउंट स्थायी रूप से ब्लॉक किए जा सकेंगे। साथ ही, प्लेटफॉर्म को यह सुनिश्चित करना होगा कि कंटेंट का स्रोत और जिम्मेदार व्यक्ति ट्रेस (trace) किया जा सके।
सरकार का यह कदम न केवल डिजिटल स्पेस की विश्वसनीयता और सुरक्षा बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि ऑनलाइन अफवाहों, झूठी सूचनाओं और दुष्प्रचार के खिलाफ एक मजबूत दीवार के रूप में कार्य करेगा।
यह संशोधन हिमाचल प्रदेश में डिजिटल दुनिया को जवाबदेह, पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल साबित हो सकता है।