हिमाचल पर्यावरण केस: सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित, 23 सितंबर को आ सकता है निर्णय
हिमाचल प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में 15 सितंबर को सुनवाई हुई। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने राज्य सरकार की उस रिपोर्ट को स्वीकार किया, जिसे 28 जुलाई को कोर्ट ने प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने इस दौरान पर्यावरणीय असंतुलन पर चिंता जताई और कहा कि यदि हिमाचल में निर्माण कार्य और विकास योजनाएं बिना वैज्ञानिक दृष्टिकोण के इसी तरह चलती रहीं, तो वह दिन दूर नहीं जब हिमाचल देश के नक्शे से गायब हो जाएगा — भगवान करे कि ऐसा न हो।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता की याचिका खारिज करते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में स्वतः संज्ञान लिया और आज की सुनवाई के बाद फैसला 23 सितंबर तक के लिए रिजर्व कर लिया। यह मामला दरअसल एमएस प्रिस्टिन होटल्स एंड रिजॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा शिमला के तारादेवी मंदिर के पास होटल निर्माण की योजना से जुड़ा है। लेकिन राज्य सरकार ने लगभग 4 महीने पहले तारादेवी के जंगल को ग्रीन एरिया घोषित कर दिया था, जिससे वहां निर्माण कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित हो गया।
प्रिस्टिन होटल्स ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसे कोर्ट ने 28 जुलाई को खारिज कर दिया। अब मामला जनहित याचिका के रूप में कोर्ट में चल रहा है। गौरतलब है कि शिमला में राज्य सरकार ने कुल 17 जंगलों को ग्रीन एरिया घोषित किया है, जिनमें निर्माण पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है। इस कदम का उद्देश्य हिमाचल की पारिस्थितिकी और जंगलों की रक्षा करना है।