आर्थिक तंगी बढ़ी, सुक्खू सरकार फिर लेगी 1500 करोड़ लोन
शिमला। हिमाचल प्रदेश में हर सरकार अपने कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) की किस्तों का बोझ छोड़ती आई है। डीए की किस्तें समय पर न मिलने से कर्मचारियों में असंतोष रहता है और सरकार की वित्तीय स्थिति पर भी दबाव पड़ता है। अब वर्तमान सुक्खू सरकार भी आर्थिक तंगी के बीच 1500 करोड़ रुपये का नया ऋण लेने जा रही है।
डीए भुगतान बना बड़ी चुनौती
प्रदेश में कर्मचारियों और पेंशनरों की संख्या 3.62 लाख से अधिक है। इनमें से 1.83 लाख कार्यरत कर्मचारी और 1.78 लाख पेंशनर शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या को हर छह महीने पर डीए की किस्त देना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। वर्तमान में सरकार पर 11% लंबित डीए किस्त का बोझ है। पहले की भाजपा सरकार ने जनवरी 2020 और जुलाई 2021 की किस्तें तो जारी कर दी थीं, लेकिन कोरोना काल में घोषित 11% डीए कर्मचारियों को अब तक नहीं मिला।
चुनाव आचार संहिता में फंसा मुद्दा
हर साल जनवरी और जुलाई में दो किस्तें जारी होती हैं, लेकिन इस बार चुनाव आचार संहिता के कारण एक किस्त लंबित है। वीरभद्र सिंह सरकार के समय से चली आ रही परंपरा के तहत सरकारें जब बदलती हैं तो नई सरकार पर डीए की पुरानी किस्तों का बोझ आ जाता है।
वित्तीय संकट से जूझती सरकार
राज्य सरकार की स्थिति ऐसी है कि अगस्त 2025 के अंत तक यदि डीए की घोषणा की जाती है, तो सरकार को 7200 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ उठाना पड़ेगा। इसमें से केवल 6700 करोड़ रुपये वेतन और पेंशन पर ही खर्च होंगे। ऐसे में सरकार को कर्मचारियों का डीए भुगतान सुनिश्चित करने और अन्य खर्चों के लिए लगातार ऋण लेना पड़ रहा है।
नई कर्ज योजना
सरकार अब 1500 करोड़ रुपये का ऋण उठाने की तैयारी कर रही है। इसमें से 1000 करोड़ रुपये बॉन्ड के जरिए और 500 करोड़ रुपये ओवरड्राफ्ट के जरिए जुटाए जाएंगे। बॉन्ड की नीलामी 26 अगस्त को होगी। इससे पहले भी प्रदेश सरकार इस वित्तीय वर्ष में 7200 करोड़ रुपये का ऋण लेने की अनुमति ले चुकी है।