हिमाचल हाईकोर्ट का फैसला मृतक कर्मचारी की पेंशन दोनों पत्नियों में बराबर बांटी जाएगी
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कमला देवी बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य एवं अन्य मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि मृतक कर्मचारी की पारिवारिक पेंशन स्वैच्छिक समझौते के आधार पर पहली और दूसरी पत्नी के बीच समान रूप से बांटी जा सकती है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि मध्यस्थता के दौरान दोनों पत्नियों ने बिना किसी दबाव या धोखाधड़ी के 50-50 प्रतिशत पेंशन बंटवारे पर सहमति जताई। अदालत ने एकल न्यायाधीश का पूर्व आदेश रद्द कर दिया और राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर पेंशन में संशोधन करने का निर्देश दिया।
मामला इस प्रकार था कि अपीलकर्ता कमला देवी के पति सोहन लाल, जो पुलिस विभाग में सहायक उप निरीक्षक थे, का 2023 में निधन हो गया। सोहन लाल ने 1979 में दूसरी शादी गायत्री देवी से की, जिनसे चार संतानें हुईं। उनके सेवा अभिलेखों में दूसरी पत्नी का नाम दर्ज होने के कारण महालेखाकार ने पेंशन गायत्री देवी के पक्ष में जारी कर दी। इस पर कमला देवी ने दावा किया कि वह कानूनी रूप से वैध पत्नी हैं और उन्हें भी पेंशन का अधिकार है।
अपील लंबित रहने के दौरान दोनों पत्नियों ने विवाद को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए रजिस्ट्रार (न्यायिक) के समक्ष बयान दर्ज कराए। उन्होंने पेंशन को समान रूप से बांटने पर सहमति जताई। खंडपीठ ने इसे वैध मानते हुए आदेश दिया कि राज्य सरकार पेंशन में संशोधन करे और दोनों पत्नियों को बराबर हिस्सा मिले।