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धर्मशाला शिफ्ट हो सकता है हिमाचल सूचना आयोग कार्यालय: कर्मचारियों में मचा हड़कंप

शिमला/27/10/2025

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हिमाचल प्रदेश सरकार एक बार फिर अपने प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। इस बार चर्चा सूचना आयोग कार्यालय (Information Commission Office) को शिमला से धर्मशाला शिफ्ट करने की है। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने कांगड़ा के डीसी को धर्मशाला में आयोग के लिए उपयुक्त भवन या भूमि तलाशने के निर्देश दे दिए हैं। इस फैसले की भनक लगते ही कार्यालय के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि यहां काम करने वाले अधिकांश कर्मचारी आउटसोर्स पर हैं और उनका भविष्य अनिश्चित नजर आने लगा है।

हैरानी की बात यह है कि शिमला में सचिवालय परिसर के पास सूचना आयोग का नया भवन लगभग तैयार हो चुका है। उम्मीद थी कि अगले वर्ष मार्च तक यह पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा और मौजूदा समय में खलीणी की किराए की बिल्डिंग से वहां दफ्तर स्थानांतरित किया जाएगा। लेकिन अब अचानक इसके धर्मशाला स्थानांतरण की चर्चा ने कर्मचारियों और अधिकारियों दोनों को असमंजस में डाल दिया है।

यह पहला मौका नहीं है जब सुक्खू सरकार ने दफ्तरों को धर्मशाला शिफ्ट करने का निर्णय लिया हो। इससे पहले वन्य प्राणी विंग कार्यालय और हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (HPTDC) को भी धर्मशाला स्थानांतरित किया जा चुका है। इसके अलावा 31 मई 2025 की कैबिनेट बैठक में रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (RERA) को भी धर्मशाला स्थानांतरित करने की मंजूरी दी गई थी।

सरकार का तर्क है कि राजधानी शिमला की सीमित भू-भौगोलिक स्थिति और बढ़ते जनसंख्या दबाव के कारण शहर को “डी-कन्जेस्ट” (भीड़ मुक्त) करना जरूरी हो गया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पहले भी कह चुके हैं कि शिमला में VIP मूवमेंट और ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ती जा रही है। कई बार डेढ़ किलोमीटर का सफर तय करने में एक घंटे तक का समय लग जाता है। इसलिए जिन विभागों के कार्यालय अन्य जगह आसानी से शिफ्ट किए जा सकते हैं, उन्हें चरणबद्ध तरीके से धर्मशाला या अन्य उपयुक्त स्थानों पर भेजने पर विचार चल रहा है।

हालांकि, कांग्रेस के भीतर इस कदम का विरोध भी शुरू हो चुका है। विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक दल की बैठक में ठियोग से विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने राजधानी से दफ्तरों को हटाने का विरोध किया था। उन्होंने तर्क दिया था कि इससे प्रशासनिक समन्वय कमजोर होगा और आम जनता को असुविधा होगी।

अब देखना यह होगा कि आने वाली कैबिनेट बैठक में सूचना आयोग कार्यालय के स्थानांतरण पर अंतिम फैसला होता है या नहीं। फिलहाल इतना तय है कि यह कदम एक बार फिर शिमला बनाम धर्मशाला की बहस को हवा दे सकता है।

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