हिमाचल में मेयर कार्यकाल पर सुक्खू सरकार का बड़ा फैसला: सुरेंद्र चौहान अगले ढाई साल तक मेयर पद पर बने रहेंगे
सिमी नंदा सहित कई दावेदारों को झटका
शिमला/25/10/2025
शिमला: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में एक अहम निर्णय लिया गया है। सरकार ने नगर निगमों में मेयर और डिप्टी मेयर का कार्यकाल ढाई साल से बढ़ाकर पांच साल कर दिया है। इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री सुक्खू के करीबी और वर्तमान शिमला नगर निगम मेयर सुरेंद्र चौहान उर्फ गुड्डू अब अगले ढाई साल तक अपने पद पर बने रहेंगे।
पहले यह प्रावधान था कि मेयर और डिप्टी मेयर केवल ढाई-ढाई साल के कार्यकाल के लिए पद पर रहेंगे, जो कि पूर्व भाजपा सरकार ने लागू किया था। लेकिन अब कांग्रेस सरकार ने इस नियम में संशोधन कर दिया है। सुरेंद्र चौहान और डिप्टी मेयर उमा कौशल ने 15 मई 2023 को शपथ ली थी और उनका कार्यकाल 15 नवंबर 2025 को समाप्त होने वाला था। अब सरकार के इस फैसले के बाद वे 2028 तक पद पर बने रहेंगे।
अनुसूचित जाति महिला पार्षदों की उम्मीदों पर पानी
इस बदलाव से सिमी नंदा, उर्मिला कश्यप, और रचना जैसी अनुसूचित जाति वर्ग की महिला पार्षदों को बड़ा झटका लगा है। आरक्षण रोस्टर के अनुसार अगले ढाई साल के लिए शिमला नगर निगम में एससी महिला मेयर बनने की संभावना थी, लेकिन अब इस परिवर्तन के कारण यह मौका फिलहाल टल गया है। कांग्रेस में सिमी नंदा को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था।
क्या है सरकार का तर्क?
कैबिनेट के निर्णय के पीछे सरकार ने ‘हॉर्स ट्रेडिंग रोकने’ का तर्क दिया है। सरकार का कहना है कि बार-बार मेयर चुनाव कराना न केवल राजनीतिक अस्थिरता पैदा करता है, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी बाधा डालता है। इसलिए अब मेयर का कार्यकाल 5 साल कर दिया गया है ताकि नगर निगम में स्थिरता बनी रहे।
विपक्ष का हमला – “सरकार चुनाव से भाग रही है”
वहीं, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को जनता के मूड और अपनी नाकामी का अंदाजा है, इसलिए सरकार मेयर के चुनाव से भाग रही है।
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि “पहले सरकार ने नगर निगम और निकाय चुनाव टाले, फिर पंचायत चुनावों को भी रोका। अब मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव भी नहीं करवा रही। यह साफ दिखाता है कि कांग्रेस को अपने ही पार्षदों पर भरोसा नहीं है।”
शिमला नगर निगम की राजनीतिक स्थिति
वर्तमान में शिमला नगर निगम में कांग्रेस के 25, भाजपा के 8, और माकपा समर्थित एक पार्षद हैं। नगर निगम के कुल 34 वार्ड हैं, जिनमें शिमला शहरी से 18, कसुम्पटी से 12, और शिमला ग्रामीण से 4 वार्ड शामिल हैं।
फिलहाल मेयर और डिप्टी मेयर दोनों ही शिमला शहरी क्षेत्र से हैं, ऐसे में राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि डिप्टी मेयर का पद शिमला ग्रामीण क्षेत्र को दिया जा सकता है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का यह निर्णय जहां उनके करीबी सुरेंद्र चौहान के लिए राहत लेकर आया है, वहीं इससे कांग्रेस पार्टी के अंदर भी हलचल तेज हो गई है। दूसरी ओर, भाजपा इस कदम को “लोकतंत्र से भागने की रणनीति” बता रही है। अब देखना यह होगा कि आने वाले महीनों में यह फैसला हिमाचल की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।