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हिमाचल में एससी-एसटी विकास निधि विशेष कानून की मांग तेज़: गदर फ्रंट का जोरदार प्रदर्शन

शिमला/28/08/2025

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शिमला। हिमाचल प्रदेश में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) विकास निधि विशेष कानून बनाने की मांग को लेकर गुरुवार को गदर फ्रंट और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने विधानसभा के बाहर चौड़ा मैदान स्थित अंबेडकर चौक पर बड़ा प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। प्रदर्शन के चलते क्षेत्र में भारी जाम लग गया और आवाजाही प्रभावित हो गई।

धरने में गदर फ्रंट के रवि कुमार दलित, पार्वती देवी, संत श्री रविदास सभा के प्रदेशाध्यक्ष कर्मचंद भाटिया, नानकी भारद्वाज, भर्मी आर्मी एकता मिशन के सुरेंद्र सिंह धर्मा, अंबेडकर मिशन के अध्यक्ष एम.आर. दरोच, बाबा साहब अंबेडकर वेलफेयर सोसायटी के प्रीतपाल सिंह, और दलित शोषण मुक्ति मंच के विवेक कश्यप सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

मुख्यमंत्री से हुई मुलाकातें और ड्राफ्ट बिल जमा प्रदर्शनकारियों ने कहा कि फरवरी 2024 में स्टेट कोलेशन फॉर लैजिसलेशन ऑफ एससी-एसटी सब प्लान का एक प्रतिनिधिमंडल ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय प्रभारी डॉ. के. राजू और अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार लिलोठिया के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री से मिला था। मुख्यमंत्री ने इस मांग पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए ड्राफ्ट बिल तैयार कर जमा करने को कहा था।

इसके बाद 14 मार्च 2024 को यह ड्राफ्ट बिल विधायक डॉ. सुरेश कुमार के माध्यम से सरकार को सौंपा गया। इसके अलावा 19 दिसंबर 2024 को शीतकालीन सत्र के दौरान भी प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस विषय पर बैठक बुलाने का आग्रह किया था।

अब तक कार्रवाई न होने पर नाराज़गी गदर फ्रंट और संबद्ध संगठनों ने आरोप लगाया कि कई बार मुख्यमंत्री से मुलाकात और ड्राफ्ट बिल प्रस्तुत करने के बावजूद अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा दलितों और आदिवासियों के अधिकारों और विकास से जुड़ा है, जिसे और देर नहीं किया जाना चाहिए।

सरकार से सख्त मांग प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि जल्द से जल्द हिमाचल प्रदेश में एससी-एसटी विकास निधि विशेष कानून लागू किया जाए ताकि इन वर्गों के लिए बजट और विकास योजनाओं को कानूनी संरक्षण मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा।

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