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हिमाचल का चर्चित छात्रवृत्ति घोटाला: आरोपी की पत्नी ने 29 करोड़ किए निवेश

सीबीआई चार्जशीट में बड़ा खुलासा

GHOTAKLA

हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले में सीबीआई जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। धन शोधन मामले के मुख्य आरोपी अरविंद राज्टा की पत्नी बबीता राज्टा ने अवैध तरीके से प्राप्त 29.11 करोड़ रुपये शराब कंपनी, होटल फर्म और अपने साझेदारों की कंपनियों में निवेश किए। यह जानकारी सीबीआई द्वारा शिमला की विशेष अदालत में दाखिल की गई चार्जशीट में सामने आई है।

चार्जशीट के मुताबिक, वर्ष 2014-15 में उच्च शिक्षा विभाग से फर्जी विद्यार्थियों के नाम पर 29.80 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति राशि का दावा किया गया था। इसमें से 29.11 करोड़ रुपये का धन शोधन हुआ। इसके लिए आरोपियों ने तीन फर्जी कंपनियां बनाई थीं। इन कंपनियों के जरिए छात्रों के खातों में भेजी गई राशि को एएसएएमएस एजुकेशन ग्रुप के खाते में ट्रांसफर कराया गया। जांच में पता चला कि बबीता राज्टा की इस ग्रुप में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी थी और उसी के जरिए निकाली गई रकम को उन्होंने अपने देवर अविनाश राज्टा की शराब कंपनी में निवेश कर दिया। इसके अलावा बड़ी धनराशि उनके भाई राकेश की होटल/रिसॉर्ट फर्म और साझेदारों अशोक ठाकुर व देवेंद्र सिंह के खातों में भी लगाई गई।

सीबीआई ने इस मामले में नए आरोपियों को भी चार्जशीट में शामिल किया है। इनमें एएसएएमएस एजुकेशन ग्रुप के साझेदार राजदीप सिंह और आईटीएफटी के कर्मचारी कृष्ण कुमार का नाम भी जोड़ा गया है।

जांच एजेंसी ने मई 2019 में आईपीसी की धारा 409, 419, 465, 466, 471, 120 (बी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। इसके दौरान सीबीआई ने आरोपियों के पांच बैंक खाते और नौ फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) फ्रीज कर दिए थे। बबीता राज्टा ने इन खातों और एफडी को डी-फ्रीज करने की मांग अदालत से की, लेकिन विशेष न्यायाधीश डॉ. परविंदर सिंह अरोड़ा ने इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि इन खातों का इस्तेमाल आपराधिक आय को जमा करने और ट्रांसफर करने में किया गया था, इसलिए फिलहाल इनकी फ्रीजिंग हटाना जांच में बाधा बन सकता है।

चार्जशीट के इस बड़े खुलासे ने छात्रवृत्ति घोटाले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। करोड़ों रुपये की यह हेराफेरी फर्जी छात्रों और कंपनियों के जरिए की गई और बाद में रकम शराब कंपनी, होटल फर्म और साझेदारों की कंपनियों में निवेश कर दी गई। अब सीबीआई की कार्रवाई के बाद इस घोटाले में शामिल लोगों की मुश्किलें और बढ़ना तय मानी जा रही हैं।

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