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हिमाचल में डॉक्टरों ने टांग की हड्डी से बनाया कैंसर मरीज का जबड़ा, AIMSS ने दी नई जिंदगी

शिमला/18/09/2025

cancer

शिमला: हिमाचल प्रदेश के शिमला स्थित अटल सुपर स्पेशलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान (AIMSS) में चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। यहां के प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने पहली बार ‘फ्री फिबुला फ्लैप’ तकनीक का उपयोग कर कैंसर मरीज के जबड़े का सफल पुनर्निर्माण किया। यह तकनीक बेहद जटिल और संवेदनशील मानी जाती है, लेकिन AIMSS की विशेषज्ञ टीम ने इसे सफलता पूर्वक संपन्न किया।

कांगड़ा जिले के 53 वर्षीय विक्रम सिंह 2016 में जीभ के कैंसर से पीड़ित थे। शुरुआती इलाज में उनकी जीभ की सर्जरी और रेडियोथेरेपी की गई। कुछ वर्षों तक स्थिति सामान्य रही, लेकिन रेडियोथेरेपी के बाद हड्डियां कमजोर हो गईं और संक्रमण फैल गया। 2024 में उनके जबड़े की लगभग 5 सेमी हड्डी निकाल दी गई और मेटल प्लेट लगाई गई, लेकिन समस्या बनी रही। संक्रमण और प्लेट की वजह से विक्रम को खाना खाने, मुंह खोलने और सांस लेने में परेशानी होने लगी।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए AIMSS की प्लास्टिक सर्जरी, डेंटल सर्जरी और एनेस्थीसिया विभाग की टीम ने मल्टी-डिसिप्लिनरी बोर्ड तैयार किया। सभी ने निर्णय लिया कि इस स्थिति में एकमात्र स्थायी समाधान ‘फ्री फिबुला सर्जरी’ है।

डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि इस प्रक्रिया में मरीज की टांग की फिबुला हड्डी, जो पतली और लंबी होती है, को निकालकर जबड़े की जगह ट्रांसप्लांट किया गया। हड्डी को U-शेप में ढालकर फिट किया गया और नसों को गर्दन की नसों से जोड़ा गया। इसके साथ त्वचा का हिस्सा भी ट्रांसप्लांट किया गया। सर्जरी करीब नौ घंटे चली। ऑपरेशन के बाद विक्रम को 2 दिन ICU में रखा गया, फिर वह सामान्य वार्ड में शिफ्ट किए गए। दसवें दिन मरीज सामान्य रूप से खाना खा और बात कर पा रहे थे।

फिबुला हड्डी चुनने का कारण इसकी लंबाई, पतलापन और आकार है, जिसे जबड़े की हड्डी के अनुरूप ढाला जा सकता है। इसके अलावा, फिबुला की स्वतंत्र रक्त वाहिनियां होने से ब्लड सप्लाई सुरक्षित रहती है। इसे निकालने से पैरों की कार्यक्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता।

सर्जरी में डॉ. नितिन कश्यप, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. निपुण शर्मा, डॉ. पुष्पिंदर सिंह, डॉ. रंगीला राम, डॉ. विक्रम टक्कर, डॉ. मनोज मैटान और डॉ. रविकांत डोगरा की टीम शामिल थी। इस तकनीक की सफलता से अब हिमाचल के मरीजों को जटिल सर्जरी के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

विक्रम सिंह ने सर्जरी के बाद कहा कि यह उनके जीवन में नई उम्मीद लेकर आई है। उन्होंने डॉक्टरों की टीम को धन्यवाद दिया और इसे अपनी “नई जिंदगी” बताया। इस सफलता ने साबित किया कि अब हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों में भी उच्च तकनीक और संवेदनशील माइक्रो-सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है।

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